धर्म आत्मा का स्वाभाविक गुण है, बाहरी आडंबर नहीं : आचार्यश्री उदारसागर महाराज
मुरैना के बड़े जैन मंदिर में आचार्यश्री उदारसागर महाराज ने धर्म को आत्मा का स्वाभाविक गुण बताते हुए सम्यक् दर्शन, ज्ञान और चरित्र को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी। मुनिश्री उपशांतसागर महाराज ने सांसारिक संबंधों को कर्मों के अधीन बताया। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट।
इंदौर • Shreephal Jain News • 1/8/2026, 3:21:43 pm
















































