धरियावद। आचार्य कल्प 108 श्री पुण्य सागर महाराज के संघ सान्निध्य में यम संल्लेखनारत मुनि उद्धार सागर महाराज का 15 अगस्त 2026 की रात्रि 10.34 बजे सम्यक समाधिमरण हुआ। मुनि श्री ने निर्यापकाचार्य श्री पुण्य सागर महाराज एवं संघ की उपस्थिति में णमोकार मंत्र का श्रवण करते हुए शांत एवं निराकुल परिणामों के साथ समाधिमरण प्राप्त किया।

काष्ठ विमान में निकली चकडोल यात्रा
16 अगस्त को प्रातः आचार्य संघ के सान्निध्य में परिवार, रिश्तेदारों और समाजजनों की उपस्थिति में मुनि श्री के पार्थिव शरीर को सुसज्जित काष्ठ निर्मित विमान में विराजित किया गया। वर्षायोग स्थल महावीर वाटिका से चकडोल यात्रा प्रारंभ हुई। बैंड-बाजों के घोष तथा मुनि श्री एवं जैन धर्म के जयकारों के साथ यात्रा कल्याणपुरा रोड, पुराना बस स्टैंड, सब्जी मंडी, सदर बाजार, पुराना बाजार और कुम्हारवाड़ा होते हुए सुकली नदी किनारे स्थित दिगंबर जैन समाधिस्थल पहुंची।
विधि-विधानपूर्वक हुआ अग्नि संस्कार
समाधिस्थल पर प्रतिष्ठाचार्य पंडित भागचंद जैन के निर्देशन में विधि-विधानपूर्वक पंचामृत अभिषेक किया गया। इसके बाद काष्ठ, श्रीफल, चंदन, कपूर, घृत, खोपरा आदि सामग्री से मुनि श्री का अग्नि संस्कार किया गया। मुनि श्री के गृहस्थ जीवन के ज्येष्ठ पुत्र मनीष वणावत ने मुखाग्नि दी। इसके बाद दूसरे पुत्र विनय वणावत तथा अनुज एवं चचेरे भाइयों सहित परिजनों ने अग्नि संस्कार की विधियों में सहभागिता की।
परिवारजन एवं समाजजन रहे उपस्थित
अग्नि संस्कार के दौरान मुनि श्री की गृहस्थ माता मणिबाई, धर्मपत्नी चंदा देवी, पुत्रवधू मोनिका एवं महिमा, पुत्री अनिता, दामाद अंकित सहित पौत्र-पौत्री, दोहिता-दोहित्री एवं अन्य परिजन उपस्थित रहे। मुनि श्री के समाधिमरण के पश्चात आचार्य कल्प श्री पुण्य सागर महाराज, मुनि एवं आर्यिका संघ ने चिता की तीन परिक्रमा लगाकर समाधिस्थ मुनि को वंदन किया।
संघ एवं समाजजनों का रहा सहयोग
अंतिम संस्कार की विभिन्न विधियों का लाभ गृहस्थ परिवारजनों ने लिया। संघस्थ बाल ब्रह्मचारिणी वीणा देवी बिगुल, विकास भैया, प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन, पंडित भागचंदन जैन, पंडित विशाल जैन और पंडित गजेंद्र पटवा के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में सभी क्रियाएं विधि-विधानपूर्वक संपन्न हुईं।
11 उपवास के साथ समाधिमरण
श्रीफल साथी अशोक कुमार जेतावत ने बताया कि 65 वर्षीय मुनि उद्धार सागर महाराज का गृहस्थ नाम कुंतीलाल वणावत था। शारीरिक अक्षमता के चलते आचार्य संघ की प्रेरणा तथा स्वयं, परिवार और समाज की अनुमति से उन्होंने 5 अगस्त 2026 को क्षुल्लक दीक्षा ग्रहण की। इसके दो दिन बाद 7 अगस्त को आचार्य श्री पुण्य सागर महाराज ने उन्हें मुनि दीक्षा प्रदान की।
मुनि दीक्षा के दिन ही उन्होंने चारों प्रकार के आहार का आजीवन त्याग कर यम संल्लेखना धारण कर ली। क्षुल्लक अवस्था में दो उपवास तथा मुनि अवस्था में नौ उपवास सहित कुल 11 उपवास के बाद उन्होंने 15 अगस्त को समाधिमरण प्राप्त किया।
समाजजनों ने की वैयावृति
वर्षायोग कमेटी अध्यक्ष सागर मल बोहरा, सेठ दिनेश कुमार जेकणावत, समाज अध्यक्ष अरविंद पचौरी, युवा रत्न भरत रत्नावत, रजनीश सुंदरोत, अभिषेक भंवरा सहित अन्य समाजजनों ने मुनि श्री की चर्या एवं वैयावृति में योगदान दिया।
गृहस्थ जीवन से संयम पथ तक
मुनि उद्धार सागर महाराज का जन्म 24 सितंबर 1960 को ग्राम खूंता, तहसील धरियावद, जिला प्रतापगढ़ में पिता शांति लाल वणावत और माता मणि बाई के यहां हुआ। उनका गृहस्थ नाम कुंतीलाल वणावत था। सात भाइयों और दो बहनों में वे ज्येष्ठ थे। उन्होंने 11वीं कक्षा तक लौकिक शिक्षा प्राप्त की।
20 फरवरी 1981 को उनका विवाह खूंता गांव निवासी जवेरलाल अणदावत एवं हुल्लासी देवी की पुत्री चंदा जैन के साथ हुआ। रोजगार के सिलसिले में उन्होंने कुवैत में भी कार्य किया। स्वदेश लौटने के बाद धरियावद में फोटो कॉपी एवं ई-मित्र संचालन को व्यवसाय बनाया।
धर्म के प्रति रही गहरी आस्था
गृहस्थ जीवन में कुंतीलाल जैन समाधिस्थ मासोपवासी षटरस त्यागी मुनि श्री वीर सागर जी महाराज (परसाद वाले), आचार्य कल्प श्री पुण्य सागर जी महाराज और वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के अनन्य भक्त रहे।
दीक्षा से समाधिमरण तक
क्षुल्लक दीक्षा : 5 अगस्त 2026
मुनि दीक्षा : 7 अगस्त 2026
यम संल्लेखना : 7 अगस्त 2026
दीक्षा गुरु : आचार्य कल्प श्री पुण्य सागर जी महाराज
दीक्षा स्थल : पुण्य सागर सभागार, महावीर वाटिका, धरियावद
समाधि स्थल : महावीर वाटिका, धरियावद
समाधि दिनांक : 15 अगस्त 2026
चकडोल यात्रा एवं अग्नि संस्कार : 16 अगस्त 2026



