आसक्ति ही दुख का मूल कारण, व्रत-नियम और संयम आत्महित के मार्ग : आचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महाराज
देहरा तिजारा में आचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महाराज ने कहा कि आसक्ति ही दुख और इच्छाओं का प्रमुख कारण है। व्रत, नियम और संयम जीव को आसक्ति से दूर कर आत्मकल्याण की ओर ले जाते हैं। धर्मसभा में श्रद्धालुओं ने संयममय जीवन की प्रेरणा ली। पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट।
देहरा तिजारा • Shreephal Jain News • 07-08-2026, 09:27 pm





















