वैयावृत भावना तीर्थंकर प्रकृति का बंध कराती है : आचार्य कल्प पुण्य सागर जी ने धर्म सभा में वैयावृत भावना का महत्व समझाया
सम्यक दृष्टि जीव गणवान पुरुषों की सेवा और वैयावृत करता है। वैयावृत में छोटे-बड़े का भेद नहीं करते हैं। आचार्य परमेष्ठी भी छोटे से छोटे साधु की भी सेवा, वैयावृत करते हैं और मन, वचन, काय से कृत-कारित अनुमोदना करते हैं। धरियावद से पढ़िए, श्रीफल साथी अशोक जेतावत की यह खबर...
धरियावद • अशोक कुमार जेतावत • 06-09-2026, 10:47 pm





















