षटरस के त्याग के साथ परनिंदा रस का त्याग भी जरूरी : आचार्य श्री नयन सागर जी : आत्मचिंतन और मौन साधना को बताया धर्म का आधार
एटा के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री नयन सागर जी महाराज ने धर्म में त्याग, मौन, आत्मचिंतन और संयम के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने षटरस के साथ परनिंदा के त्याग का संदेश देते हुए उपवास को आत्मा के समीप रहने की साधना बताया। पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट।
एटा • Shreephal Jain News • 05-08-2026, 08:38 pm



























