धर्म भय का नाम नहीं, बल्कि जीवन की दिशा है : धर्म तो वह पवित्र चेतना है, जो मनुष्य को उसके भीतर के सत्य से परिचित कराती है
जहां भय समाप्त होता है, वहीं से धर्म की शुरुआत होती है। मनुष्य के जीवन में जैसे ही धर्म शब्द प्रवेश करता है, उसके मन में अनेक प्रश्न जन्म लेने लगते हैं। यह कैसे करना होगा ? इसकी क्रियाएँ क्या होंगी? कहीं कोई गलती न हो जाए? यदि त्रुटि हो गई तो उसका परिणाम क्या होगा? मुरैना/सांगान
इंदौर • Shree Phal News • 12-05-2026, 09:09 pm



















