दान और भक्ति से निखरता है जीवन, सिद्धत्व ही आत्मा का अंतिम लक्ष्य : निर्यापक मुनि श्री समतासागर महाराज ने णमोकार महामंत्र के पांच पदों का समझाया आध्यात्मिक रहस्य
कुण्डलपुर में निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागरजी महाराज ने दान, भक्ति, संयम और आत्मचिंतन का महत्व बताते हुए कहा कि सिद्धत्व ही आत्मा का अंतिम लक्ष्य है। धर्मसभा में उन्होंने णमोकार महामंत्र के पांच पदों का आध्यात्मिक रहस्य समझाया और भक्ति को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी। पढ़िए श्रीफल साथी राजीव सिंघई की यह रिपोर्ट।
कुण्डलपुर (म.प्र.) • राजीव सिंघई • 06-08-2026, 03:29 pm





















