सागवाड़ा। पुनर्वास कॉलोनी, सागवाड़ा से आयोजित अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में वैज्ञानिक धर्माचार्य कनकनंदी गुरुदेव ने आत्मा के अक्षय-अनंत स्वरूप एवं उसके विशिष्ट गुणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आत्मा अमूर्तिक, चैतन्य स्वरूप और आनंदघन है। आत्मा अपने गुणों के माध्यम से स्वयं को जानने और अनुभव करने में सक्षम है।

आत्मा स्वयं प्रकाशित चैतन्य स्वरूप

आचार्य श्री ने आत्मा के स्वरूप को समझाते हुए कहा कि जिस प्रकार दीपक स्वयं प्रकाशित होता है और दूसरों को भी प्रकाशित करता है, उसी प्रकार आत्मा अपनी चेतना के माध्यम से स्वयं को जानती है तथा अपने ज्ञान और अनुभव से अन्य पदार्थों को भी जानती है।

उन्होंने कहा कि आत्मा स्वसंवेदन के माध्यम से स्पष्ट रूप से जानी जाती है। आत्मा का चैतन्य स्वरूप ही उसकी पहचान है, जिसके माध्यम से वह जानने और अनुभव करने का कार्य करती है।

नित्य है आत्मा

आचार्य श्री कनकनंदी गुरुदेव ने कहा कि आत्मा स्वतंत्र द्रव्य है। प्रत्येक द्रव्य उत्पाद, व्यय और ध्रौव्य से युक्त होता है। पर्यायों में परिवर्तन होते रहने के बावजूद द्रव्य का ध्रौव्य स्वरूप बना रहता है। इसी कारण आत्मा भी नित्य है। उन्होंने बताया कि संसारी जीव जिस शरीर को प्राप्त करता है, आत्मा अपने संकोच-विस्तार गुण के कारण उस शरीर में पूर्ण रूप से व्याप्त होकर रहती है।

अक्षय-अनंत सुख आत्मा का श्रेष्ठ गुण

आचार्य श्री ने कहा कि आत्मा का सर्वश्रेष्ठ गुण अक्षय-अनंत सुख है। इसी गुण के कारण जीव अन्य द्रव्यों से श्रेष्ठ माना जाता है। आत्मा में अनंत ज्ञान का गुण विद्यमान है और इसी अनंत ज्ञान के माध्यम से जीव समस्त लोक और अलोक को जानने में समर्थ होता है।

एक और अनेकात्मक स्वरूप

आचार्य श्री कनकनंदी गुरुदेव ने आत्मा के एक एवं अनेकात्मक स्वरूप की व्याख्या करते हुए कहा कि आत्मा अनेक प्रकार के ज्ञान स्वरूप होने से अनेक होते हुए भी एक चेतना स्वभाव के कारण एक है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मा को सर्वथा केवल एक या केवल अनेक नहीं कहा जा सकता। वह एक तथा अनेकात्मक स्वरूप वाली है। आत्मा के स्वरूप और गुणों को समझना आत्मकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में मिली जानकारी

आत्मा के स्वरूप एवं गुणों पर आचार्य श्री के इस महत्वपूर्ण उद्बोधन की जानकारी विजय लक्ष्मी गोदावत, सागवाड़ा ने दी। वेबिनार के माध्यम से श्रद्धालुओं को आत्मा के चैतन्य, नित्यत्व, अनंत ज्ञान और अक्षय-अनंत सुख जैसे गुणों को समझने का अवसर मिला।