चमत्कार नहीं चारित्र की पूजा करना सिखाता है जैन दर्शन : आचार्यश्री उदारसागर जी ने धर्मसभा में अंध श्रद्धा से बचने का दिया संदेश
आचार्य श्री उदारसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए अमूढ़दृष्टि अंग की विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने कहा कि मूढ़ता अर्थात अज्ञानता और विवेकहीनता से रहित दृष्टि को अमूढ़दृष्टि कहा जाता है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर...
मुरैना • मनोज जैन नायक • 01-09-2026, 05:57 pm





















