उत्तम त्याग कहो जग सारा, औषध,शास्त्र अभय आहारा : त्याग से ही व्यक्ति बनता है महान -मुनिश्री अक्षय सागर
त्याग की भावना जैन धर्म में सबसे अधिक है क्योंकि जैन संत सिर्फ घर,द्वार ही नहीं यहां तक कि अपने कपडों का भी त्याग कर देते हैं और सम्पूर्ण जीवनभर दिगंबर मुद्रा धारण करके समाधि मरण की भावना को रखते हैं। उक्त विचार वर्णीनगर मड़ावरा में दशलक्षण पर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म के अ
इंदौर • Shreephal Jain News • 16-09-2024, 07:36 pm





















