जैन मंदिरों में गूजे जयकारे, प्रभावना पूर्वक हो रहे धार्मिक आयोजन : इन्द्रियों पर विजय ही सबसे बड़ी तपस्या - अविचल सागर महाराज
तपने से जैसे अशुद्ध वस्तु शुद्ध होती है, उसी तरह अपनी आत्मा को तप के माध्यम से जब तपाते हैं तो जीवन में निखार एवं परिणामों में निर्मलता आती है। उक्त विचार मुनि श्री अविचल सागर महाराज ने उत्तम तप दिवस पर देते हुए कहा कि इच्छाओं का निरोध भी तप है किसी तपस्वी की जब छवि देखते हैं वो
इंदौर • Shreephal Jain News • 15-09-2024, 08:11 pm




















