सामूहिक आचरण में तो बने रहें जैन : सोचिए आने वाली पीढ़ी को क्या देकर जाएंगे हम
जैन धर्म में सात्विक भोजन करने का उपदेश तीर्थंकरों ने दिया। पूरे विश्व में जैन समाज की पहचान भी इसी से है। समय के चलते आज जैन परिवार भी जमीन में उगने वाले कंद जैसे आलू, मूली, गाजर, लहसुन आदि खाने लग गए हैं। जैन धर्म की संस्कृति पर कुठाराघात करती इस प्रवृति पर पढ़िए श्रीफल जैन न्य
इंदौर • Shreephal Jain News • 28/2/2024, 12:36:58 pm




















