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समसामयिक एवं धार्मिक विषयों पर विशेष आलेख

चारूकीर्ति स्वामी की 75वीं जन्मजयंती के उपलक्ष्य में विशेष श्रृंखला-2 : चारुकीर्ति जी के व्यक्तित्व का सबसे बड़ा अलंकरण 'अजातशत्रुता' -आचार्य श्री सुविधिसागर महाराज

श्रवणबेलगोला के समाधिस्थ बड़े स्वामी जी चारूकीर्ति भट्टारक जी को सामाजिक और धार्मिक योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने समाज में नैतिकता, आध्यात्मिकता और अहिंसा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अपने जीवन को जैन धर्म के सिद्धांतों के पालन और शिक्षा में सम

श्रवणबेलगोला Shreephal Jain News 5/9/2024, 1:11:50 pm

चारूकीर्ति स्वामी की 75वीं जन्मजयंती के उपलक्ष्य में विशेष श्रृंखला-1 : चारूकीर्ति स्वामी जी ने बहुत पहले से अपनी साधना को शुरू कर रखा था - आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज

श्रवणबेलगोला के समाधिस्थ बड़े स्वामी जी चारूकीर्ति भट्टारक जी को सामाजिक और धार्मिक योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने समाज में नैतिकता, आध्यात्मिकता और अहिंसा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अपने जीवन को जैन धर्म के सिद्धांतों के पालन और शिक्षा में सम

श्रवणबेलगोला Shreephal Jain News 4/9/2024, 1:46:41 pm

चीरहरण का जिम्मेदार कौन ? : महिलाओं के प्रति सोच को बदलने के लिए सार्थक सामूहिक प्रयास करने होंगे

महिला पर जब भी विपत्ति आती है तो यही होता है, संस्कारों को बेड़ियां कहकर अथवा सशक्तीकरण की दुहाई देकर अथवा अपराधी और उसके साथियों को आचरण व्यवहार को परिभाषित करने में व्यर्थ का समय खर्च किया जाता है। पुरुष प्रधान समाज, महिला जागृति अभियान, महिला सशक्तीकरण इन विषयों पर चर्चा करने

इंदौर Shreephal Jain News 2/9/2024, 6:00:28 am

पर्युषण महापर्व एक सितम्बर से प्रारम्भ : आत्मा की शुद्धि के लिए करेंगे तप व जप

जैन धर्म के पर्युषण पर्व मनुष्य को उत्तम गुण अपनाने की प्रेरणा हैं। इन दिनों जैन धर्मावलंबी व्रत, तप, साधना कर आत्मा की शुद्धि का प्रयास करते हैं और स्वयं के पापों की आलोचन करते हुए भविष्य में उनसे बचने की प्रतिज्ञा करते हैं। इस पर्व का मुख्य उद्देश्य आत्मा को शुद्ध बनाने के लिए

इंदौर Shreephal Jain News 29/8/2024, 2:21:17 pm

जैन धर्म के अनुसार रक्षाबंधन क्यों? : रक्षा बंधन को सच्चे अर्थों में मनाना है तो बाहर और भीतर से एक समान हों

प्रतिवर्ष श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को रक्षाबंधन अत्यंत प्राचीन पर्व है। इसकी परम्परा अठारहवें तीर्थंकर अरहनाथ के तीर्थ से महामुनि विष्णुकुमार के निमित्त से प्रारंभ हुई है। रक्षा बंधन पर हममें जो करूणाभाव है वह तन-मन धन से अभिव्यक्त हो। यह एक दिन के लिए नहीं, सदैव के लिए हमारा स्वभाव

इंदौर Shreephal Jain News 18/8/2024, 10:16:10 pm

साधना और सेवा का पर्व चातुर्मास 20 जुलाई से शुरू : 10 किलोमीटर के दायरे से बाहर नहीं जा सकेंगे

जैन समाज में चातुर्मास 20 जुलाई से प्रारंभ होगा। इस दौरान जैन साधु-साध्वी चार माह तक एक ही स्थान पर निवास कर आत्मसाधना करेंगे और करवाएंगे। प्रवचनों और त्याग-तपस्याओं का वातावरण बनेगा। जैन संतों के लिए यह आगमिक विधान है कि वे चातुर्मास काल में चार कोस अर्थात् शहर के प्राचीन चुंगी

इंदौर Shreephal Jain News 19/7/2024, 11:54:29 am

आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव में होंगे कई कार्यक्रम : आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का 152वां वर्ष वर्धन 27 जून को

प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती गुरुणाम गुरु आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का 152वां वर्ष वर्धन "दिवस आषाढ़ कृष्णा छठ 6 दिनांक अनुसार 27 जून 2024 को है। आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद वर्ष 1924 में हुआ वर्ष 2024 में आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव आचार्य श्री वर्धमा

इंदौर Shreephal Jain News 27/6/2024, 11:53:47 am

जैन तीर्थंकर प्रतिमा पद्मासन में होती है ध्यान अवस्था की मुद्रा में : जैन ऋषि-मुनियों की दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है ध्यान योग

एक समय था जब भारत भारतीयों की जीवन शैली का अभिन्न अंग हुआ करता था ध्यान योग परंतु समय बदला, परंपराएं बदलीं, जीवन शैली बदली और आधुनिकता की चकाचौंध में भारतीय अपनी मूल संस्कृति को भूलता गया। उस भूली हुई परम्परा को सहेजने और दुनियाभर में प्रचारित करने का उपक्रम कुछ महापुरुषों ने किय

इंदौर Shreephal Jain News 20/6/2024, 4:27:28 pm

धार्मिक आयोजनों में बढ़ता बोतल बंद पानी का चलन : पानी छानकर पीने की जैन समाज की आदर्श परंपरा पर हो रहा कुठाराघात

जैन धर्म के अनुसार पानी छानने की जो भावना है वह जीव-दया की भावना है। जैन धर्म के अनुसार जल में त्रस जीव भी होते हैं। विज्ञान के अनुसार एक बूंद पानी में 36450 जीव होते हैं, त्रस जीवों की संख्या तो बहुत ज्यादा है। आज ज्यादातर हमारे धार्मिक आयोजनों में भी बिना छने पानी का धड़ल्ले से

इंदौर Shreephal Jain News 13/6/2024, 3:46:19 pm

श्रुत पंचमी का आध्यात्मिक-धार्मिक महत्व : जिनवाणी माता पहली बार शास्त्र के रूप में हुईं अंकित

देव शास्त्र और गुरु हमारे आराध्य हैं। ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी जैन धर्म की पवित्र तिथि है। जिस दिन जिनवाणी माता पहली बार शास्त्र के रूप में अंकित हुईं, इसी कारण से श्रुत पंचमी कहा जाता है। इस दिन जिनवाणी माता का जुलूस निकाल कर विशेष पूजा की जाती है। पढ़िए आर्यिका श्री महायश मति, संघस्

इंदौर Shreephal Jain News 8/6/2024, 2:57:11 pm

तीर्थंकर भगवान महावीर जन्मकल्याणक पर विशेष निवेदन आलेख : 101 वर्ष से जारी है अहिंसा यज्ञ, हमारी धरोहर-हमारी पहचान

मारोठ में बकरशाला में आज भी बलि के बकरे सुरक्षित रखे जाते है क्यों ? 101 वर्ष पहले मारोठ में एक सेठ हुए श्री बीजराज पाण्ड्या जो एक उत्कृष्ट श्रावक के रुप में अपना जैन दर्शन अनुरुप व्यवसाय करते थे। हमारा आपका भी फर्ज बनता है कि हम मारोठ की जैन समाज को तन-मन का बल मजबूत कर धनबल प्र

इंदौर Shreephal Jain News 13/4/2024, 2:42:13 pm

भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी उत्तरप्रदेश- उत्तराखंड अंचल का दो दिवसीय आंचलिक अधिवेशन : तीर्थक्षेत्रों के संरक्षण, संवर्द्धन के लिए संकल्पित होने का समय

श्री अहिक्षेत्र पार्श्वनाथ अतिशय तीर्थक्षेत्र प्राकृतिक जलवायु एवं शुद्ध वातावरण के बीच शांत वातावरण में स्थित एक सुप्रसिद्ध तीर्थ भूमि है। मान्यता के अनुसार यह तीर्थंकर पार्श्वनाथ की केवलज्ञान भूमि है , यहीं पार्श्वनाथ भगवान पर घोर उपसर्ग भी किया था। यहां चमत्कार के अनेक कथानक उ

इंदौर Shreephal Jain News 12/4/2024, 5:19:03 pm

मुनि दीक्षा दिवस पर विशेष आलेख: नक्षत्र बनकर जगमगाएंगेअतिवीर जी मुनिराज

प्रशममूर्ति आचार्य श्री 108 शान्तिसागर जी महाराज (छाणी) की पट्ट परम्परा में पंचम पट्टाधीश परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज ने अपनी पारखी नज़रों से एक अनमोल रत्न को तराशा। पूज्य गुरुवर ने अपने प्रियाग्र शिष्य की विशेष योग्यता, दिव्यता, संगठन व संचालन कुशलत

इंदौर Shreephal Jain News 9/4/2024, 2:09:13 pm

31 मार्च दीक्षा दिवस पर विशेष : निद्रा विजेता कहलाए जैनाचार्य ज्ञानसागर महाराज

आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज ने समाज की मुख्य धारा से अलग-थलग रहने वाले बिहार, बंगाल, उड़ीसा के सराक बन्धुओं को समाज की मुख्य धारा में जोड़ते हुए उन्हें शिक्षित व सशक्त बनाकर उन्हें संगठित किया और समाज की मुख्य धारा से जोड़ा। इस कारण उन्हें सराकोद्धारक नाम की विशिष्ट पहचान मि

इंदौर Shreephal Jain News 30/3/2024, 5:34:15 pm

साधना और मंगल भावना की संपूर्णता का नाम है पूज्य आर्यिका 105 श्री सृष्टि भूषण माताजी आर्यिका105 सृष्टि भूषण माताजी अवतरण दिवस 23 मार्च पर विशेष आलेख

आध्यात्म की सरिता स्वरूपा, आत्महित एवं परहित में संलग्न पूज्य माता श्री आर्यिका 105 श्री सृष्टि भूषण माताजी जी, साधना और मंगल भावना की संपूर्णता का नाम है। सृष्टि का अलंकरण करती पूज्य माता जी सृष्टि के दुखों को भी हरती है। परम पूजनीय जैनधर्म प्रभाविका आर्यिका 105 सृष्टि भूषण माता

इंदौर Shreephal Jain News 22/3/2024, 5:40:15 pm

विश्व गौरया दिवस आज : तकनीक का असर पड़ रहा है गौरैया पर

आज दुनिया भर में ‘विश्व गौरैया दिवस’ मनाया जा रहा है. यह हर साल 20 मार्च को होता है। दुनिया भर में गौरैया पक्षी की संख्या तेजी से घट रही है। ऐसे में इस पक्षी के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के मकसद से ‘विश्व गौरैया दिवस’ मनाया जाता है। आज हमें गौरया की चहचहाहट सुनाई नहीं दे र

इंदौर Shreephal Jain News 20/3/2024, 2:12:06 pm

समस्त विशालताओं में विशालतम है स्त्री : विश्व की समस्त विशालताओं में विशालतम है-परमात्मा, आसमां और महात्मा। किंतु ये शब्द संग्रह भी मां वर्ण के बिना अधूरे हैं, अपूर्ण हैं।

इस अवसर्पिणी युग का प्रारंभ ही स्त्री शक्ति के विकास एवं महत्व की सर्वाधिक महत्वपूर्ण आधारशिला है। प्रभु श्री आदिनाथ ने अपने ग्रहस्थावस्था में भी भोगभूमि से कर्मभूमि में परिणत भरत क्षेत्र की आकुलित जनता को षटकर्म का उपदेश दे कर जीवन निर्वाह की कला से परिचित कराया। असि, मसि, कृषि,

इंदौर Shreephal Jain News 8/3/2024, 9:00:12 am

अपने ज्ञान और अपनी तपस्या से पूरे समाज का पथ प्रदर्शन कर रही : दिगम्बर जैन परम्परा में आर्यिका रत्नों की समृद्ध परम्परा

दिगम्बर जैन परम्परा के साधु की चर्चा आते ही मन-मस्तिष्क में कठोर तपस्वी, त्यागमूर्ति, संसार की समस्त क्रियाओं से उदासीन संत की छवि उभरती है। पुरूष संतो के साथ ही जैन समाज में महिला संत यानी आर्यिकाएं भी हैं जो अपने ज्ञान और अपनी तपस्या से पूरे समाज का पथ प्रदर्शन कर रही हैं। पढ़ि

इंदौर Shreephal Jain News 8/3/2024, 7:00:37 am

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : जैन धर्म की पताका फहराती प्रमुख जैन नारियां

आदिपुराण में कहा गया है कि ‘कन्या रत्नात् परं नान्दय’ अर्थात् कन्यारत्न से बढ़कर कोई रत्न नहीं है। नारी की महत्ता उसके नारीत्व गुणों से है। श्रेष्ठ महापुरुषों को जन्म देने वाली माता लोक में पूजनीय है। पढ़िए डाॅ. ज्योति जैन, खतौली का यह विशेष आलेख.... विश्व जननी ‘नारी’ सृष्टि के वि

इंदौर Shreephal Jain News 8/3/2024, 6:00:48 am

अयोध्या के मंदिर जैसा है जैन तीर्थ श्री सुमति नाथ मंदिर : पंचकल्याणक में पहली बार बिना धन की बोली

इंदौर में बना जैन तीर्थ श्री सुमति नाथ मंदिर अयोध्या के मंदिर जैसा ही बना है, आध्यात्मिकता और मैनेजमेंट को समझने के लिए युवाओं के लिए यह मंदिर जैन शोध का विषय है । यहां पर रामलला जैसी 51 इंच की श्री सुमतिनाथ भगवान की मूर्ति है गर्भगृह, नक्काशी, उड़ीसा के ही योग्य कारीगरों द्वारा क

इंदौर Shreephal Jain News 2/3/2024, 8:29:31 pm