स्त्रियों में हमेशा प्रमाद विद्यमान रहता है-आचार्यश्री वर्धमान सागरजीः श्री महायशमति ने श्रावक का अर्थ प्रतिपादित किया
प्रमादमय स्त्रियों को प्रमादमय मूर्तियों की उपमा दी गई है, अर्थात स्त्रियों में हमेशा प्रमाद विद्यमान रहता है, जिस प्रकार मिट्टी की मूर्ति में मिट्टी की बहुलता होती है उसी प्रकार स्त्री में प्रमाद की बहुलता के कारण इन्हें प्रमदा की संज्ञा दी गई है। धर्मनगरी मुंगाणा में विराजित आच
इंदौर • Shreephal Jain News • 15-02-2025, 12:15 am





















