मार्गदर्शक, रक्षक और आध्यात्मिक गुरु भी होता है पिता: प्रकृति का पालक होने के साथ ही धैर्यता की प्रतिमूर्ति
कहने को सभी धर्मों में पिता को ईश्वर से भी अधिक सम्मान दिया जाता है, क्योंकि वह सृजक है। वह बनाता है और उनके ही इस कर्म से प्रकृति का संतुलन होता है। जैन धर्म में भी पिता को मार्गदर्शक, रक्षक और आध्यात्मिक गुरु की पदवी से विभूषित किया गया है। 15 जून को पूरा विश्व पितृ दिवस मना रह
इंदौर • Shreephal Jain News • 15-06-2025, 12:34 am





















