विनाश मानव पर छाता है, तब विवेक मर जाता है: मुनिश्री विलोकसागर ने कर्म फल और पुण्य की व्याख्या की
मुनि श्री विलोक सागर महाराज बड़े जैन मंदिर में इन दिनों विराजित हैं। यहां उनकी धर्म देशना में रोज बढ़ी संख्या में समाजजन एकत्र हो रहे हैं। गुरुवार को मुनिश्री विलोकसागर ने धर्मसभा में कहा कि इस असार संसार में सभी प्राणी अपने पाप पुण्य के अनुसार सुख और दुख भोगते हैं। मुरैना से पढ़िए,
इंदौर • Shreephal Jain News • 28-06-2025, 01:26 am





















