न तेरा न मेरा जग चिड़िया रैन बसेरा सुबह शाम का डेरा’ : मुनिश्री प्रमाण सागर ने आकिंचन्य धर्म का महत्व समझाया
जिस धन को जिस संपत्ति को तुमने अपना मान रखा है। वह धन संपत्ति भी कब चली जाएगी पता नहीं। प्रकृति कब तुम्हारे साथ कौनसा खेल खेल दे पता नहीं। जब यह सब छूट जाने वाला है, फिर दंभ किस बात का ? मेरा कुछ भी नहीं इस अनूभूति से ही आकिंचन धर्म प्रकट होता है। यह उद्गार मुनि श्री प्रमाणसागर म
इंदौर • Shreephal Jain News • 06-09-2025, 04:11 pm



















