पूर्ण ज्ञान तथा कर्म सिद्धांत का ज्ञान होना आवश्यक: धर्मसभा में मुनिश्री के प्रवचनों का लाभ ले रहे हैं धर्मप्रेमी श्रद्धालु
संत अपनी इच्छा से शरीर छोड़ते हैं, क्योंकि वे शरीर के बंधन से मुक्त होते हैं । यह उदगार मुनि श्री संभव सागरजी महाराज ने भगवती आराधना ग्रंथ का स्वाध्याय कराते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शरीर मोक्ष प्राप्ति का एक मात्र साधन हैं। विदिशा से पढ़िए, यह खबर... विदिशा। संत अपनी इच्छा
इंदौर • Shree Phal News • 04-01-2026, 02:28 am





















