🧘 राजस्थान के संत

राजस्थान के संत

राजस्थान के महान जैन संतों का परिचय एवं जीवनी

ब्रह्म धर्मसागर कवि के साथ संगीतज्ञ भी थे: नेमि और राजुल के गीतों की खूब है ख्याति

राजस्थान के जैन संतों की परंपरा में ब्रह्म धर्मसागर जी का स्थान भी काफी महत्वपूर्ण है। इन्होंने अधिकांश गीत अपने गुरु की प्रशंसा में ही लिखे हैं। इनके गीतों में सौंदर्य का भी पुट है तो विरह की वेदना भी नजर आती है। जैन धर्म के राजस्थान के दिगंबर जैन संतों पर एक विशेष शृंखला में 42

इंदौर Shreephal Jain News 12/4/2025, 6:00:00 am

मुनिश्री राजचंद्र ने पद विहार कर अपनी वाणी से जनजागरण किया: चंपावती सील कल्याणक में नजर आती है इनके कृतित्व की झलक

राजस्थान के जैैन संतों की समृ़द्ध श्रंखला के तहत कई संतों का संक्षिप्त परिचय प्राप्त होता है। इनमें मुनि राजचंद्र जी भी हैं। इन्होंने राजस्थान में पद विहार कर जन-जन तक अपनी वाणी के माध्यम से जनजागरण किया है। इन्होंने भी हिन्दी साहित्य में सृजन कर धर्म प्रभावना के दीप प्रज्वलित कि

इंदौर Shreephal Jain News 11/4/2025, 6:00:37 am

भट्टारक सकलभूषणजी ने अपने गुरु की रचनाओं में किया था सहयोग: जयपुर के आमेर शास्त्र भंडार में हैं रचनाएं संग्रहित

राजस्थान के जैन संतों ने राजस्थान की धरती पर रहकर साहित्य को इतना समृद्ध कर दिया है कि उनकी रचनाएं आज भी बहुत प्रभावी लगती हैं। भट्टारक सकलभूषण ने संस्कृत, हिन्दी, राजस्थानी के अलावा गुजराती में भी अपनी कलम का जादू बिखेरा है। जैन धर्म के राजस्थान के दिगंबर जैन संतों पर एक विशेष श

इंदौर Shreephal Jain News 10/4/2025, 6:00:12 am

संत श्री हर्ष कीर्ति की सभी कृतियां राजस्थानी में: ये कविवर बनारसीदास के रहे समकालीन

राजस्थान के जैन संत व्यक्तित्व एवं कृतित्व के अंतर्गत राजस्थान के जैन संतों द्वारा लिखित हिन्दी साहित्य की खूब चर्चा होती है। इनकी रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। जितनी उस काल में रहीं, जब इनको लिखा गया। हिन्दी के साथ-साथ राजस्थानी भाषा को भी इन विद्वान संतों ने खूब पोषित किय

इंदौर Shreephal Jain News 9/4/2025, 6:00:40 am

ब्रह्म कपूरचंदजी ने पार्श्वनाथ रास को काव्य पद्य में रचित किया: पार्श्वनाथ रास की हस्तलिखित प्रति मालपुरा, जिला टोंक में मिली

राजस्थान के जैन संतों के बारे में इतना तो जानकर पता लगता ही है कि अधिकांश जैन संत 16 से 17वीं सदी के दौरान हुए और उन्होंने अपनी गुरु-शिष्य परंपरा को सदैव बनाए रखा। ब्रह्म कपूरचंद ने राजस्थान में रहकर खूब साहित्य की रचना की। इसमें उनकी सबसे अधिक विख्यात रचना पार्श्वनाथ रास के रूप

इंदौर Shreephal Jain News 8/4/2025, 6:00:32 am

भट्टारक महीचंद्र ने रचनाओं में डिंगल भाषा का किया प्रयोग: लवांकुश छप्पय कवि की चर्चित रचना

राजस्थान जैन संतों के परिचय में उनकी साहित्यिक अभिरुचि खुलकर सामने आई है। हर जैन संत ने अपनी रचना संसार में राजस्थानी और गुजराती भाषा का भरपूर उपयोग किया है। भट्टारक महीचंद्र ने भी अपनी चर्चित लवाकुंश छप्पय में डिंगल भाषा का प्रयोगकर उसे प्रभावोत्पादक बनाया है। जैन धर्म के राजस्थ

इंदौर Shreephal Jain News 7/4/2025, 5:32:19 pm

संत श्री कल्याण कीर्ति ने साहित्य रचना के साथ-साथ धर्म प्रभावना को भी बढ़ाया: चारुदत्त प्रबंध के पदों की रचना कर दिए संदेश

राजस्थान के जैन संत: व्यक्तित्व एवं कृतित्व के दौर में वर्णित जानकारी के अनुसार राजस्थान में 17वीं में हुए जैन संतों का भी यहां अच्छा खासा प्रभाव रहा है। इन संतों ने साहित्य रचना के साथ-साथ धर्म प्रभावना को बढ़ाया है। इसके चलते ही यहां जैन संतों की वाणी का व्यापक असर भी देखने में

इंदौर Shreephal Jain News 2/4/2025, 6:00:39 am

आचार्य श्री नरेंद्र कीर्ति की वाणी, लेखनी, साहित्य सबकुछ प्रभावशाली: राजस्थान के जैन संतों ने जनमानस को खूब प्रभावित किया

राजस्थान के जैन संत, उनकी वाणी, उनकी लेखनी, उनका साहित्य इतना प्रभावशाली है कि पढ़ने वाला भावविभोर हुए बिना नहीं रहता। राजस्थान के संतों की परंपरा में आचार्यश्री नरेंद्र कीर्ति जी का भी विशिष्ट स्थान है। इन्होंने आग्रह पर भी रचनाकर्म कर साहित्य लेखन में योगदान दिया। जैन धर्म के रा

इंदौर Shreephal Jain News 1/4/2025, 6:00:04 am

संत ब्रह्म अजित 17वीं शताब्दी के संत थे: भृगुकच्छपुर (भडोच) के नेमिनाथ चैत्यालय में हनुमच्चरित की थी समाप्त

राजस्थान की धरती पर जिन जैन संतों ने अपने साहित्य के माध्यम से संयम, नियम और धर्म के प्रति जनमानस में अलख जगाई है। उसी का प्रतिफल है कि जैन धर्म और भगवान तीर्थंकरों का गुणानुवाद जन-जन तक पहुंचा। भट्टारक विद्यानंदी के शिष्य ब्रह्म अजित जी ने राजस्थानी के अलावा हिंदी में भी रचना की

इंदौर Shreephal Jain News 31/3/2025, 6:00:32 am

संत श्री त्रिभुवन कीर्ति ने अपने रास में रोमांचक घटनाओं को संजोया: राजस्थान के जैन संतों की परंपरा में श्रेष्ठ विद्वान थे त्रिभुवन कीर्ति

राजस्थान के जैन संत व्यक्तित्व और कृतित्व श्रंखला में राजस्थान की धरती पर हुए जैन संतों ने बहुत सा साहित्य रचा। वही साहित्य आज गुरु-शिष्य परंपरा का अलग महत्व प्रतिपादित कर रहा है। सभी संतों ने अपने गुरु की वंदना में गीत, रास और छंद आदि लिखे हैं। जैन धर्म के राजस्थान के दिगंबर जैन

इंदौर Shreephal Jain News 29/3/2025, 6:00:36 am

जैन संत संयमसागर जी का साहित्य में रहा बड़ा योगदान: गुरु वंदना से लेकर भगवान की भक्ति के पदों की रचना

राजस्थान के जैन संत व्यक्तित्व और कृतित्व श्रंखला में आज जैन संत श्री संयमसागर जी के बारे में जानते हैं। संत श्री संयमसागर जी भट्टारक कुमुदचंद्र के शिष्य थे। ये ब्रह्मचारी थे और अपने गुरु को साहित्य निर्माण में योगदान दिया करते थे। जैन धर्म के राजस्थान के दिगंबर जैन संतों पर एक व

इंदौर Shreephal Jain News 28/3/2025, 6:00:06 am

ब्रह्म गणेश ने अपने गुरुजनों का परिचय किया प्रस्तुत: इतिहास को मोड़ने का किया कार्य

राजस्थान के जैन संत: व्यक्तित्व और कृतित्व के माध्यम से संतों और साधुओं के जीवन और उनके काल में हुए जैन धर्म के प्रति जनजागरण के बारे में जान रहे हैं। ऐसे अनगिनत संत हैं। जिन्होंने बहुत बेहतर धर्म जागरण किया और साहित्य सेवा भी की। उनके बारे में जाने। जैन धर्म के राजस्थान के दिगंब

इंदौर Shreephal Jain News 27/3/2025, 6:00:37 am

आगम काव्य, पुराण, नाटक छंद शास्त्र के वेत्ता थे संत श्री सुमति सागर: अभयनंदी एवं रत्नकीर्ति दोनों के स्तवन गीत लिखे

राजस्थान में जैन संतों ने आगम काव्य, पुराण, नाटक और छंद लिखे। इसमें गुरुओं के स्तवन किया गया। संत श्री सुमति सागर ऐसे संत रहे, जिन्होंने दो भट्टारकों का काल देखा और उनका सानिध्य प्राप्त किया। इन्होंने इन्हीं भट्टारकों के स्तवन भी लिखे। राजस्थान जैन संतः व्यक्तित्व और कृतित्व की श

इंदौर Shreephal Jain News 26/3/2025, 6:00:27 am

धर्म आराधना के साथ गुरु वंदना कर साहित्य की रचना का दौर: ब्रह्म जयराज ने अपनी रचना में गुरु छंद लिखे

राजस्थान के जैन संतों ने अपने गुरुओं की कीर्ति का खूब बखान किया है। राजस्थान की धरती पर जैन संतों की स्थापित परंपरा में कई संतों ने अपने लेखन के माध्यम से जैन धर्म को पोषित और पल्लवित किया है। धर्म के प्रति जनजागरण तो वे अपने प्रवचनों में करते ही थे, लेकिन अपनी रचनाओं में जैन गुर

इंदौर Shreephal Jain News 25/3/2025, 6:00:09 am

राजस्थान और गुजरात में समान रूप से धर्म प्रभावना हुई: भट्टारक अभयनंदी के छंदों में मिलता इनका बखान

राजस्थान के जैन संत व्यक्तित्व एवं कृतित्व के तहत राजस्थान में जन्में, यहीं पर संत बने और यहीं की भाषा में साहित्य की रचना कर जन-जन तक धर्म प्रभावना पहुंचाने वाले संतों ने खूब छंद लिखे। काव्य लेखन से लेकर गद्य लेखन तक धर्म की ही बात प्रमुख रही। भट्टारक अभयनंदी भी ऐसे ही संत हैं।

इंदौर Shreephal Jain News 24/3/2025, 6:00:15 am

ब्रह्म धर्मरुचि ने गुजराती मिश्रित राजस्थानी में रचना कर भक्ति का दिया संदेश: भट्टारक अभयचंद्र जी के शिष्य थे ब्रह्म धर्मरुचि

राजस्थान के जैन संतों के व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में पढ़ने के बाद एक बात तो स्पष्ट है कि राजस्थान के धरती पर जितने भी संतों ने जन्म लिया। उन्होंने राजस्थान और गुजरात राज्य में समान रूप से विहार कर जैन धर्म की मजबूती के लिए जनजागरण किया और अपने साहित्य, काव्य और कृतियों की रच

इंदौर Shreephal Jain News 23/3/2025, 6:00:20 am

ब्रह्म गुणकीर्ति की रचनाधर्मिता से समृद्ध हुआ राजस्थान का शास्त्र भंडारः रामसीता रास के माध्यम से सिद्ध की अपनी विद्वत्ता

राजस्थान में जैन संतों की कड़ी बहुत लंबी है। इनमें एक से एक उद्भट्ट विद्वान सामने आए हैं। जिन्होंने न केवल साहित्य सृजन कर शास्त्रों को समृद्ध किया है बल्कि जैन धर्म की ध्वजा को आगे ले जाकर जैन समाज को धर्म परायणता का पाठ भी पढ़ाया और उन्हें सीख, उपदेश सहित कर्तव्य निभाने जैसे महत्

इंदौर Shreephal Jain News 21/3/2025, 6:00:45 am

भट्टारक प्रभाचंद्र साहित्य और पुरातत्व के प्रति जनसाधारण में आकर्षण पैदा किया: राजस्थान में कितने ही मंदिरों में इनके द्वारा प्रतिष्ठित मूर्तियां मिलती हैं

राजस्थान के जैन संत के परिचय में हमें कई ऐसे संतों के बारे में जानने का मौका मिलता है, जिनकी अद्भुत बुद्धिकुशलता के सामने सभी जन नत्मस्तक हुए। भट्टारक प्रभाचंद्र भी ऐसे ही संत थे। जिन्होंने साहित्य के जीर्णोद्धार से लेकर मंदिरों के संरक्षण के प्रति जैन समाज में जनजागरण का बीड़ा उठ

इंदौर Shreephal Jain News 20/3/2025, 6:00:32 am

भट्टारक श्री जिनचंद्र जी साहित्य और संस्कृति का करते थे प्रचार: ऐतिहासिक लेख में है जिनचंद्र की का यशोगान

राजस्थान के जैन संत श्रंखला में श्रीफल जैन न्यूज की ओर से आज भट्टारक जिनचंद्र जी को परिचित करवा रहे हैं। भट्टारक जिनचंद्रजी राजस्थान, उत्तरप्रदेश, पंजाब, देहली प्रदेश विहार करते थे। जनता को वास्तविक धर्म का उपदेश देते थे। प्राचीन ग्रंथों की नई-नई प्रतियां लिखवाकर मंदिरों में विरा

इंदौर Shreephal Jain News 19/3/2025, 6:00:50 am

भट्टारक श्री भुवनकीर्ति ने शिष्यों को उत्कृष्ट विद्वान एवं साहित्य सेवी बनाया: विविध शास्त्रों के ज्ञाता एवं प्राकृत, संस्कृत तथा राजस्थानी के प्रबल विद्वान थे भुवनकीर्ति

राजस्थान के जैन संतों ने जहां जैन धर्म के लिए अपने गुरुओं के साथ समाज को चैतन्य किया वहीं अपने साहित्य, काव्य, दोहों और छंद के माध्यम से जनजागरण किया। जिन भक्ति के लिए प्रेरित किया। संतों ने जहां दिगंबर जैन मंदिरों में प्रतिमाओं की प्रतिष्ठाएं खूब करवाईं। इन्हीं में से एक संत हैं

इंदौर Shreephal Jain News 18/3/2025, 6:00:55 am