अंतरंग की भावना के अनुरूप होती है परिणामों की प्राप्ति : आचार्य निर्भय सागरजी का हुआ भव्य मंगल प्रवेश
हमने भगवान महावीर के सिद्धांतों को हृदय से स्वीकार किया होता, उनके सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार किया होता तो आज सम्पूर्ण विश्व में सत्य अहिंसा का बोलबाला होता । यह उद्गार आचार्य श्रीनिर्भयसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुरैना से पढ़िए, य
इंदौर • Shree Phal News • 23/3/2026, 9:35:15 pm




















