ज्ञान अमृत के समान है : चर्या शिरोमणी दिगम्बर जैनाचार्य श्री विशुद्धसागर जी गुरुदेव
चर्या शिरोमणी दिगम्बर जैन आचार्य श्री विशुद्धसागर जी गुरुदेव ने नांदणी में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि अंतिम तिर्थेश वर्धमान स्वामी के शासन में हम सभी विराजते हैं। तीर्थंकर भगवान की पीयूष देशना जिनेंद्रवाणी जगतकल्याणी है। यह सर्वज्ञशासन, नमोस्तुशासन जयवन्त हो। जयवन्त हो व
इंदौर • Shreephal Jain News • 10-10-2024, 02:40 am





















