साधु को आहार देने में ही मनुष्य जीवन की सार्थकता : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने आत्म शक्ति के परिचय को आवश्यक बताया
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कर्मभूमि के पहले भोग भूमि में कल्पवृक्ष होते थे, जिससे इच्छा पूरी होती थी, इसी प्रकार कामधेनु से भी इच्छित कामना पूर्ण होती थी। सीकर से पढ़िए, श्रीफल साथी डॉ. राजेश पंचोलिया की यह खबर...
सीकर • Shreephal Jain News • 25-10-2026, 04:55 pm





















