धर्मसभा में दिए उपदेश : सुख-शांति चाहते हो तो दुकान और भक्ति के बीच संतुलन जरूरी है-आचार्य श्री विमर्श सागर
आपकी आत्मा अमर है, अनंत गुणों से परिपूर्ण है, परंतु यह पहचान तभी होगी जब आप अपने ही गुणों से परिचय प्राप्त करें।" — यह सुमंगल वचन गुरुवार को जिनागम पंथ प्रवर्तक, संघ शिरोमणि, भावलिंगी संत दिगंबराचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने सहारनपुर जैन बाग स्थित श्री 1008 महावीर जिनालय में
इंदौर • Shreephal Jain News • 08-07-2025, 04:49 pm





















