महान आत्माएं निंदा भी करते हैं तो बहुत संभलकर: मुनि श्री सुधासागरजी महाराज के सान्निध्य में नवीन वेदी पर हुई जगत कल्याण की कामना के लिए महाशांति धारा
महान आत्माएं निंदा करते हुए भी सुधारने का भाव रखता है क्योंकि, निंदा का उद्देश्य कभी किसी को नीचे गिरना नहीं होता वल्कि उसे पुनः अपने मार्ग में स्थित करना होता है और होना ही चाहिए। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में चल रहे स्नातक सम्मेलन में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त
इंदौर • Shreephal Jain News • 04-10-2025, 12:54 am





















