After_the_fire_test,_clay_becomes_the_auspicious_pot_and_then_the_religion_of_kindness_is_revealed.

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सारांश:-

इंदौर। अग्नि की परीक्षा देकर माटी मंगल कलश बीन पाती है। मार्दव धर्म कहता है, जिसे ऊंचा उठना है उतना झुकना सीखो सबसे आगे चलना है तो सबसे पीछे चलना सीखो। यह उद्गार दलाल बाग मैदान में धर्मसभा को मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि स्वाभिमान की आड़ में अभिमान मत करो मां की मर्यादा देखो। तीन खंड के अधिपति नारायण श्रीकृष्ण कहते हैं। नारायण से दूत बनकर मार्दव धर्म का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। नारायण श्री कृष्ण शांति के लिए दुष्ट दुर्योधन के सामनेदूत बनने को तैयार हो गए। शांति के लिए नारायण जैसे पदधारी भी दुष्ट दुर्योधन के समाने भी झुकते चले जाते हैं। सारा अपमान सहन करते चले जाते है। शांति के लिए धर्म के लिए आप झुक रहे तो समझ लेना कि आपके अंदर मार्दव प्रकट हो गया हर व्यक्ति कमजोर व्यक्ति पर क्रोध करता है। एक बर्नी बहु के हाथ से फूट गई। एक झूठ बोलने से यदि शांति होती है तो मां झूठ बोलते को तैयार रहती है।

जिज्ञासा समाधान के पहले मप्र महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि आज महानगर इंदौर देशभर से आए फार्म के माध्यम से चयनित होकर आए हजारों शिविरार्थियों के लिए तपस्या स्थली बन गया है। जहां मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र की गुरुकुल परंपरा के अनुसार 33 वां श्रावक संस्कार शिविर भव्य अति भव्य रूप में आयोजित किया जा रहा है। इस शिविर में देश भक्ति के साथ संस्कारों का बीजारोपण किया जा रहा है। शिविर के प्रथम सत्र का आगाज ध्यान के माध्यम से lहो रहा है।

अहंकार त्यागकर आत्मचिंतन की ओर आएं

शिविर में हजारों श्रावक-श्राविकाओं को अहंकार त्यागकर विनम्रता अपनाने और आत्मचिंतन करने की प्रेरणा देते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि मार्दव का अर्थ केवल विनम्र शब्दों का प्रयोग करना नहीं, बल्कि मन से अहंकार, मान और श्रेष्ठता के भाव को समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जितना बड़ा बनता जाता है, उसके भीतर उतनी ही विनम्रता आनी चाहिए। फल से लदा वृक्ष सदैव झुकता है, जबकि खाली वृक्ष अकड़ा हुआ खड़ा रहता है। श्रद्धालुओं से आत्ममंथन का आह्वान करते हुए पूछा कि हम जीवन में सम्मान चाहते हैं लेकिन, क्या दूसरों को सम्मान देने के लिए तैयार हैं? हम चाहते हैं कि लोग हमारी बात सुनें पर क्या हम दूसरों की बात सुनने की विनम्रता रखते हैं? यही मार्दव धर्म हमें अपने भीतर झाँकने और व्यवहार में विनय लाने की शिक्षा देता है अहंकार होता है, वहां संबंध कमजोर पड़ते हैं, जहां विनम्रता होती है। वहां प्रेम बढ़ता है। मान से दूरी पैदा होती है, जबकि मार्दव से आत्मीयता और शांति का जन्म होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को स्मरण कराया कि भगवान बनने की यात्रा अहंकार से नहीं, विनय से शुरू होती है।

माता-पिता के सामने अहंकार को झुकाना सीखिए

उन्होंने कहा कि पहले गुरु के सामने झुकना सीखिए फिर माता-पिता के सामने, गुणवानों के सामने और अंततः अपने भीतर बैठे अहंकार को झुकाना सीखिए। जो व्यक्ति झुकना सीख जाता है, वही वास्तव में ऊँचा उठने के योग्य बनता है श्रद्धालुओं का जनसैलाब इस बात का प्रमाण रहा कि धर्म आज भी समाज को दिशा देने की शक्ति रखता है। उत्तम मार्दव धर्म एक ऐसे समाज की प्रेरणा देता है, जहाँ पद से नहीं, विनय से सम्मान मिले, धन से नहीं, गुणों से पहचान बने और अहंकार से नहीं, सेवा व संस्कार से नेतृत्व हो श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया कि वे अपने पद, धन, विद्या और प्रतिष्ठा का अहंकार नहीं करेंगे; गुणवानों का सम्मान करेंगे; स्वयं विनम्र बनने का प्रयास करेंगे तथा अपने व्यवहार से परिवार और समाज में प्रेम, एकता और संस्कारों को बढ़ावा देंगे। झुकना कमजोरी नहीं, महानता की पहचान है।

यह समाजजन उपस्थित थे

धर्मसभा में प्रमुख रूप से चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन गोधा, सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद गोधा, चक्रवर्ती मनीष गोधा, महोत्सव अध्यक्ष अशोक डोशी, महामंत्री हर्ष जैन, आकाश कोयला, प्रिंसपाल टोंग्या, संजय पाटोदी, हुकुमचंद जैन काका, प्रदीप ब्रह्मचारी, विनोद भैया, विजय धुर्रा, प्रचार प्रमुख संजय पाटौदी, सोनाली बागड़िया, अर्चना गोधा, सौरभ बड़जात्या, राहुल सेठी, भूपेंद्र भोपाली रहे।