धरियावद। आचार्य कल्प श्री पुण्य सागर जी महाराज के संघस्थ नव दीक्षित मुनि श्री उद्धार सागर जी महाराज की यम संल्लेखना शुक्रवार को लगातार आठवें दिन भी जारी रही। क्षपक मुनिराज श्री उद्धार सागर जी महाराज को लगातार आचार्य श्री एवं संघस्थ मुनिराजों और आर्यिका माताजी द्वारा संबोधन, स्त्रोत पाठ, चालिसा, मंत्र जाप्य, समाधिमरण पाठ का श्रवण कराया जा रहा है।

मुनि-आर्यिका संघ की सहमति से गृह त्याग कराया

दिगंबर जैन समाज के अशोक कुमार जेतावत ने बताया कि स्थानीय श्रावक श्रेष्ठ कुंतिलाल जैन (वणावत) का स्वास्थ्य निरंतर गिरता जा रहा था। इनके परम मित्र राजेंद्रप्रसाद गनोड़िया, बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी ‘बिगुल’, अंतररष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन की प्रेरणा और आचार्य कल्प श्री पुण्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री उपदेश सागर जी महाराज के सदुपदेश से गृहस्थ परिवारजन, समाज एवं मुनि-आर्यिका संघ की सहमति से गृह त्याग कराया गया। 5 अगस्त को महावीर वाटिका में अपार जनसमूह के बीच आचार्य श्री ने उन्हें जैनेश्वरी क्षुल्लक दीक्षा प्रदान की। दीक्षा के उपरांत 66 वर्षीय कुंतिलाल वणावत का क्षुल्लक उद्धार सागरजी नामकरण हुआ तो समारोह स्थल जयकारों से गुंजायमान हो गया।

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अल्प मात्रा में जल एवं नारियल पानी लिया

क्षुल्लक उद्धार सागर महाराज ने दीक्षा दिवस पर एक दिन का उपवास रखा। इसके अगले दिन 6 अगस्त को आहारचर्या में अल्प मात्रा में जल एवं नारियल पानी लिया। उनके स्वास्थ्य में निरंतर गिरावट और शारीरिक दुर्बलता को देखते हुए आचार्य कल्प श्री पुण्य सागर जी महाराज ने 7 अगस्त शुक्रवार को उन्हें मुनि दीक्षा प्रदान कर नवीन नामकरण मुनि श्री उद्धार सागर जी महाराज किया।

शांत परिणामों के साथ यम संल्लेखना जारी

शारीरिक अक्षमता के चलते शरीर आहार ग्रहण करने में सक्षम नहीं होने पर मुनि श्री उद्धार सागर महाराज को चारों प्रकार के आहार का त्याग कराकर निर्यापकाचार्य पुण्य सागर जी महाराज ने 7 अगस्त को ही उन्हें यम संल्लेखना प्रदान कर दी। तब से लगातार उनकी शांत परिणामों के साथ यम संल्लेखना चल रही है।