कुण्डलपुर (दमोह)। सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में पूज्य बड़े बाबा भगवान आदिनाथ की पावन सन्निधि में आयोजित धर्मसभा में निर्यापक मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को विनम्रता, पुरुषार्थ, सेवा और आत्मोन्नति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि महानता प्राप्त करने से पहले बड़े बाबा ने अपने जीवन में लघुता, विनम्रता और अथक पुरुषार्थ का आदर्श प्रस्तुत किया।
लघुता से प्रकट होती है प्रभुता
मुनिश्री ने कहा कि जो व्यक्ति अपने भीतर जितना अधिक लघुता का भाव धारण करता है, उसके भीतर उतनी ही प्रभुता स्वतः प्रकट होने लगती है। भगवान आदिनाथ का जीवन प्रत्येक साधक के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने आत्मशक्ति को पहचानकर सीमित से असीम और सूक्ष्म से विराट बनने का मार्ग दिखाया।
उन्होंने कहा कि जैसे एक छोटा-सा बीज आगे चलकर विशाल वृक्ष का रूप धारण करता है, उसी प्रकार साधना, संयम और पुरुषार्थ के माध्यम से आत्मा भी केवलज्ञान जैसी परम अवस्था को प्राप्त कर सकती है।
बड़े बाबा की भक्ति से मिलता है आत्मबल
मुनि श्री ने कहा कि पूज्य आचार्य गुरुवर भी बड़े बाबा के चरणों में आकर निरंतर आत्मिक उन्नति का अनुभव करते रहे। बड़े बाबा की भक्ति और साधना व्यक्ति के जीवन की बाधाओं को दूर कर उसे परमार्थ के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं के भाव, अनुशासन और समय पर शुद्ध वस्त्र धारण कर अभिषेक की तैयारी करने की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे दिव्य धार्मिक दृश्य देवों और गुरुवरों को भी आनंदित करने वाले होते हैं तथा बड़े बाबा की महिमा निरंतर बढ़ती है।
धर्म के साथ सेवा और स्वावलंबन भी जरूरी
धर्मसभा में मुनिश्री ने सेवा और स्वावलंबन के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आचार्य गुरुदेव के आशीर्वाद से कुण्डलपुर में दयोदय गोशाला, हथकरघा श्रमदान और पूर्णायु संस्थान जैसे सेवा प्रकल्प संचालित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में पूज्य गुरुवर के आशीर्वाद से इन योजनाओं की शुरुआत हुई थी। हथकरघा योजना आज ग्रामीण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का उदाहरण बन चुकी है।
30 गांवों के 350 परिवारों को मिला रोजगार
मुनि श्री ने बताया कि कुण्डलपुर और आसपास के लगभग 30 गांवों के करीब 350 परिवार हथकरघा योजना से जुड़े हैं। जिन क्षेत्रों में पहले रोजगार के सीमित साधन थे, वहां आज अनेक परिवार मेहनत के माध्यम से सम्मानपूर्वक अपनी आजीविका चला रहे हैं। कई परिवार प्रतिमाह लगभग 30 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से श्रमदान केंद्र में निर्मित हथकरघा के शुद्ध वस्त्र खरीदने का आग्रह किया। मुनिश्री ने कहा कि अभिषेक एवं धार्मिक अनुष्ठानों में सात्विक वस्त्रों का उपयोग करना चाहिए।
धर्म समाज उत्थान का माध्यम
मुनि श्री समतासागर महाराज ने कहा कि धर्म केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है। धर्म सेवा, स्वावलंबन और समाज के उत्थान का माध्यम भी है। आचार्य गुरुदेव के आशीर्वाद से संचालित सेवा प्रकल्प ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूती देने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में भी सहयोग कर रहे हैं।
मंगल कलश स्थापना 9 अगस्त को
राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्या वाणी एवं प्रचारमंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि कुण्डलपुर में रविवार, 9 अगस्त को चातुर्मास मंगल कलश स्थापना समारोह दोपहर 1 बजे से आयोजित किया जाएगा।
कुण्डलपुर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के सभी पदाधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अधिकाधिक संख्या में क्षेत्र पर पहुंचकर समारोह में सहभागी बनने और धर्मलाभ लेने की अपील की है।
आत्मकल्याण और मोक्षमार्ग की ओर बढ़ने का संदेश
समापन अवसर पर निर्यापक मुनि श्री समतासागर महाराज ने मंगलकामना करते हुए श्रद्धालुओं से भगवान आदिनाथ की आराधना कर अशुभ कर्मों का क्षय करने तथा जीवन की बाधाओं को दूर करने का आह्वान किया। उन्होंने सभी को तीर्थंकरों द्वारा प्रदर्शित मोक्षमार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
उन्होंने जिनशासन की प्रभावना बढ़ने तथा सभी के जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मंगल संदेश दिया।




