सीकर। राजकीय अतिथि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सीकर में संघ सहित विराजित हैं। प्रातः काल से लेकर देर रात्रि तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम संघ सानिध्य में हो रहे हैं। 9 अगस्त धार्मिक संस्कार शिविर विभिन्न धार्मिक विषयों पर प्रारंभ हो रहा है। जिसमें आचार्य श्री ,संघ के मुनिराज,आर्यिका माताजी धर्म प्रेमियों को धर्म का ज्ञान देंगे। जब से 37 साधुओं का संघ का वर्षायोग प्रारंभ हुआ है प्रातः से लेकर धर्म की गंगा प्रवाहित हो रही है। जिसमें प्रातः काल श्री जी का अभिषेक , स्वाध्याय , प्रवचन, दोपहर को आचार्य श्री द्वारा स्वाध्याय कक्षा, शाम को मुनिश्री हितेंद्र सागर जी द्वारा उपदेश रात्रि को आरती पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे हैं।

मोक्ष कल्याणक दिवस पर अनेक भव्य जीव लेंगे दीक्षा
संघ सानिध्य में 19 अगस्त 23 वे तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक दिवस पर अनेक भव्य जीव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से संयम दीक्षा अंगीकार कर मोक्ष मार्ग पर अग्रसर होंगे। दोपहर कालीन सत्र में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रवचन कर गाथा की वाचना में बताया कि निश्चय और व्यवहार नय को समझना जरूरी है, निश्चय हमें वास्तविक स्वरूप का बोध कराता है व्यवहार नय स्वरूप की ओर आगे बढ़ने की संयम साधना सिखाता है। आगम जिनवाणी अनुसार सम्यक दर्शन, ज्ञान, चरित्र मोक्ष मार्ग है।
प्रवचन को जीवन में अपनाना धर्म
आत्मा का स्वभाव शुद्ध, ज्ञान, आनंद में है किंतु हमारी दृष्टि अपने स्वरूप पर कम बाहरी राग, द्वेष ,मोह ,विषयों पर होने के कारण आप संसार भ्रमण कर रहे हैं। प्रवचन सुनना धर्म नहीं ,प्रवचन को जीवन में अपनाना धर्म है। आप स्वयं से यह प्रश्न करें कि कितनी बार आत्मा के स्वरूप को याद किया, क्रोध को क्षमा में ,मान को विनय में, लोभ को संतोष में परिवर्तित किया है।
आत्मा का मरण नहीं होता
डॉ. राजेश पंचोलिया के अनुसार शाम को मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने एकत्व भावना का चिंतन में बताया कि चेतन आत्मा अनादि काल से कर्मों के कारण विकारी होकर चारों गतियां में, अनेक पर्याय में भ्रमण कर रही है। जीव का शरीर बदलता है आत्मा का मरण नहीं होता। सभी गति में पर्याय में जीव का नहीं शरीर का मरण होता है।भाव परिणाम कर्मों के कारण जीव गति पर्याय बदलता है।जीव जन्म, मरण ,सुख दुख, पुण्य ,पाप भोगता है। सब नाते रिश्ते परिवार साथी सगे नहीं है। मुनि श्री उपस्थित श्रावक श्राविकाओं की जिज्ञासा का समाधान आगम जिनवाणी अनुसार कर रहे हैं।
भक्ति दुखों को दूर करने के लिए रामबाण औषधि
प्रातः कालीन सभा में आर्यिका श्री निर्मुक्तमतिजी ने भक्ति का महत्व बताया कि प्रभु की भक्ति से बड़े-बड़े कष्ट उपसर्ग दूर हो जाते है अनेक कथा उदाहरण के माध्यम से बताया कि एक मेंढक भगवान के दर्शन करने फूल मुंह में लेकर जा रहा था हाथी के पैर में दबकर मृत्यु हो गई किंतु उसके भाव परिणाम अच्छे होने से वह स्वर्ग में देव बना
सच्ची भक्ति की देवता भी प्रशंसा करते हैं भक्ति दुखों को दूर करने के लिए रामबाण औषधि है मैना सुंदरी ने श्रीपाल और 700 कुष्ठ रोगियों का रोग भगवान की भक्ति से दूर किया।
सीकर नगर सम्मेद शिखर जी समान बनेगा
प्रभु भक्ति से उपसर्ग कष्ट दूर होने के लिए साक्षात उदाहरण में स्वयं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी मौजूद है। जिनकी नेत्र ज्योति चली जाने पर उन्होंने बिना डाक्टरी इलाज के प्रभु की भक्ति से नेत्र ज्योति वापस प्राप्त की। सूर्य से रोशनी, चंद्रमा से शीतलता, संतों के आगमन से इतिहास बनता है। सीकर नगर सम्मेद शिखर जी समान बनेगा।गुरु के जाने पर नगर सुना सुना हो जाता है, गुरु के आने से सोना ही सोना हो जाता है। माताजी ने पूजन की क्रिया ,पूजा का महत्व बताया।



