इंदौर। नेमी नगर जैन कॉलोनी में दीक्षा के पावन पथ पर अग्रसर दीक्षार्थी सुमित्रा दीदी, जयश्री दीदी एवं निर्मला दीदी के मंगलमय दीक्षा संस्कारों के अंतर्गत धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला जारी है। 9 अक्टूबर को मेहंदी का मंगलमय कार्यक्रम हुआ। वहीं 10 अक्टूबर को प्रातःकालीन मंगल बेला में दीक्षार्थियों द्वारा श्री गणधरवलय विधान संपन्न किया गया। दीक्षा महोत्सव के अंतर्गत शनिवार को प्रातःकाल से विभिन्न मांगलिक क्रियाएं प्रारंभ होंगी। इस दौरान मंगल स्नान, हल्दी सहित अन्य पारंपरिक धार्मिक रस्में संपन्न की जाएंगी। इसके बाद रविवार को 11 अक्टूबर दोपहर 2 बजे ज्येष्ठाचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज के पावन करकमलों से दीक्षार्थियों के मंगलमय दीक्षा संस्कार संपन्न होंगे। यह पावन अवसर त्याग, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करेगा। समस्त श्रद्धालुओं से आग्रह है कि इस ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक क्षण के साक्षी बनकर दीक्षार्थियों के संयम पथ की मंगल अनुमोदना करें।

निरंतर शुभोपयोग में प्रवृत्त रहते

आचार्यश्री सुनीलसागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में जीवन के वास्तविक उद्देश्य और शुभ-अशुभ उपयोग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हर किसी के अपने-अपने मायने हैं। व्यक्ति स्वयं को देखने के बजाय दूसरों को दिखाने के लिए आईने तलाशता रहता है। जिन लोगों के चित्त में जिनालय निर्माण की कल्पना और जिनेंद्र भगवान के कीर्तिस्तंभ स्थापित करने का संकल्प निरंतर चलता रहता है, वे निरंतर शुभोपयोग में प्रवृत्त रहते हैं।

हमारा उपयोग किस दिशा में लग रहा

वहीं, दूसरी ओर राग-रंग और सांसारिक आकर्षणों के लिए महल बनाने में ही जब उपयोग लगा रहता है, तब अशुभोपयोग की प्रवृत्ति होती है। गृहस्थ जीवन में दोनों प्रकार की व्यवस्थाओं का अपना स्थान है, लेकिन यह समझना आवश्यक है कि हमारा उपयोग किस दिशा में लग रहा है। जीवन की सार्थकता इस बात में है कि हमारी भावना, चिंतन और पुरुषार्थ धर्म तथा आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ें।