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हावड़ा/कोलकाता। विवेक विहार क्लब हाउस, बंगवासी हावड़ा में अभिक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी महामुनिराज ससंघ के पावन सान्निध्य में अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान का दशम राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न हुआ। अधिवेशन का प्रमुख संदेश रहा—‘धर्म सिखाओ, धर्म बचाओ’।

अधिवेशन में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों और महिला मंडलों ने सहभागिता की। जैन धर्म के प्रचार-प्रसार, संस्कार संरक्षण, युवा जागरूकता, सामाजिक सेवा और संगठन की एकता जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

ध्वजारोहण और दीप प्रज्वलन से शुरुआत

अधिवेशन संयोजक डॉ. नीरज जैन, दिल्ली ने बताया कि दो सत्रों में आयोजित कार्यक्रम का प्रथम सत्र ध्वजारोहण, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण से प्रारंभ हुआ। आचार्य श्री विद्यानंद जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर आयोजन का शुभारंभ किया गया।

प्रथम सत्र का संचालन विधि जैन, मुंबई एवं मनोज जैन शास्त्री, दिल्ली ने किया।

19 प्रदेशों ने दिया सेवा कार्यों का विवरण

राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली सहित 19 प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने वर्षभर में किए धार्मिक, सामाजिक, सेवा एवं संगठनात्मक कार्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया।

प्रदेशों की गतिविधियों की समीक्षा के साथ संगठन विस्तार, कार्यकर्ता सहभागिता, संस्कार निर्माण और सेवा कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा की गई। प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे के अनुभवों से प्रेरणा लेकर भविष्य की कार्ययोजना को सशक्त बनाने का संकल्प लिया।

‘मैं’ से ‘हम’ की भावना अपनाने का संदेश

आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज ने संगठन की उपयोगिता, सामाजिक एकता, सेवा और आत्मसमर्पण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संगठन से संपर्क, समन्वय, सहयोग, सद्भाव और समर्पण की भावना विकसित होती है। यही भाव समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनते हैं।

उनके उद्बोधन के दौरान ‘धर्म सिखाओ, धर्म बचाओ’ का उद्घोष सभागार में गूंज उठा। आचार्यश्री ने प्रतिनिधियों से धर्म के सिद्धांतों को जीवनचर्या में अपनाने का आह्वान किया।

महिला शक्ति और बाल प्रकोष्ठ की भूमिका

द्वितीय सत्र का शुभारंभ कोलकाता महिला मंडल एवं उत्तम नगर, दिल्ली महिला मंडल के मंगलाचरण से हुआ। आर्यिका वर्धस्वनंदनी माताजी ने कहा कि एक प्रज्वलित दीप अनेक दीपों को प्रकाशित कर सकता है। उसी प्रकार धर्म के प्रति जागरूक और सक्रिय व्यक्ति समाज में व्यापक प्रेरणा का माध्यम बन सकता है।

महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष रैना जैन ने बताया कि अधिवेशन में महिला शाखाओं ने भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए। इस अवसर पर नई महिला शाखाओं के साथ ‘बाल प्रकोष्ठ’ का गठन हुआ तथा कोलकाता बाल प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों का सम्मान किया गया।

60 प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित

राष्ट्रीय कार्यकारिणी के निकुंज जैन, डॉ. नीरज जैन, इंजीनियर भूपेंद्र जैन, राजकमल सरावगी, रमेशचंद गर्ग, सीए संजय जैन, संजीव जैन, विनोद मिलेनियम, संजय जैन बड़जात्या एवं अन्य वक्ताओं ने संगठन विस्तार संबंधी सुझाव रखे।

आगामी जनगणना में धर्म के कॉलम में ‘जैन’ पहचान दर्ज कराने के लिए जागरूकता, सरकारी योजनाओं एवं अल्पसंख्यक विभाग में सहभागिता, डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने और युवाओं को अवसर देने जैसे विषयों पर चर्चा के बाद 60 प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित किए गए। द्वितीय सत्र का संचालन राष्ट्रीय प्रचार मंत्री संजय जैन बड़जात्या ने किया।

राजस्थान लगातार चौथी बार प्रथम

वर्षभर के उत्कृष्ट कार्यों के आधार पर राजस्थान प्रांत को लगातार चौथी बार प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्रांतीय अध्यक्ष पदमचंद जैन बिलाला, पंकज लुहाड़िया, संजय जैन बड़जात्या एवं रमेश गर्ग ने पुरस्कार ग्रहण किया।

द्वितीय पुरस्कार युवा प्रकोष्ठ को प्रदान किया गया, जिसे राष्ट्रीय पदाधिकारी गौरव जैन, अंकुर जैन पुणे एवं अंशुल जैन सहित पदाधिकारियों ने ग्रहण किया। तृतीय पुरस्कार महिला प्रकोष्ठ को दिया गया।

अधिवेशन में कोलकाता इकाई के अध्यक्ष संजय काला इस्पात, नवनीत बज, आर्यन जैन, अरुण जैन सहित स्थानीय सेवाभावी कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया।

श्रीफल साथी : हावड़ा-कोलकाता