इंदौर। इंदौर के हृदय स्थल इतवारिया बाजार, सर हुकुमचंद मार्ग स्थित श्री सेठ माणकचंद मगनीराम गोठ शांतिनाथ दिगंबर जैन कांच मंदिर में पर्वाधिराज पर्युषण महामहोत्सव 2026 बुधवार से शुरू हुआ है। यह महोत्सव शुक्रवार 25 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान प्रतिदिन रात्रि 8 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। परम संयोजिका पुष्पा कासलीवाल, अमित कासलीवाल, कमलेश कासलीवाल, प्रदीप चौधरी, संजय पापड़ीवाल, प्रिंसपाल टोंग्या, सुशील पांड्या आदि ने बताया कि महोत्सव के दौरान 16 सितंबर को संगीतमय भक्तामर पाठ किया गया। 17 सितंबर संगीतमय आरती का आयोजन हुआ।
आगामी दिनों में इन कार्यक्रमों की रहेगी धूम
उन्होंने बताया कि 18 सितंबर को स्वस्ति धाम मूवी का प्रदर्शन साधना मादावत रंगशाला प्रोडक्शन की ओर से किया जाएगा। 19 सितंबर को संगीतमय आरती और भजनों पर आधारित नृत्य का कार्यक्रम होगा। 21 सितंबर को सुगंध दशमी पर आकर्षक साज-सज्जा और मंडल विधान का आयोजन किया जाएगा। 22 सितंबर को परिचर्चा, 23 सितंबर को अक्षय निधि तंबोला, 24 सितंबर को म्यूजिकल धार्मिक तंबोला, 25 सितंबर को उत्तम क्षमावणी पर्व पर दोपहर 3 बजे कांच मंदिर प्रांगण से भव्य अनंत चतुर्दशी शोभायात्रा निकलेगी, जो राजवाड़ा, मल्हारगंज, गोराकुंड, खजूरी बाजार होते हुए वापस कांच मंदिर पर संपन्न होगी। 27 सितंबर को विश्व क्षमापना महोत्सव मनाया जाएगा।
विश्व प्रसिद्ध कांच मंदिर का इतिहास और विशेषता
इस मंदिर का निर्माण इंदौर के प्रसिद्ध उद्योगपति, कॉटन किंग कहे जाने वाले सर सेठ हुकुमचंद कासलीवाल ने करवाया था। अंग्रेजों ने उन्हें ‘सर’ की उपाधि दी थी। उन्होंने 1903 से 1920 के बीच 11 साल में इस मंदिर को बनवाया। कहते हैं इसे बनाने में करीब 1 लाख 62 हजार रुपये और 250 कारीगर लगे थे। मंदिर बाहर से एक मध्ययुगीन हवेली जैसा दिखता है, सफेद पत्थर से बना है और इसके साथ ही उनका शीशमहल भी है लेकिन, अंदर जाते ही सब कुछ कांच का है। फर्श, दीवारें, खंभे, छत, दरवाजे, झूमर, सब रंग-बिरंगे कांच और मोज़ेक से सजे हैं। इसके लिए बेल्जियम से कांच मंगवाया गया और नक्काशी के लिए ईरान और जयपुर से कारीगर बुलाए गए। खास बात यह है कि इसकी जुड़ाई में सीमेंट नहीं, बल्कि चूने का इस्तेमाल हुआ है, इसलिए बिना पंखा-एसी के भी अंदर ठंडक रहती है। मुख्य गर्भगृह में भगवान शांतिनाथ की काले संगमरमर की मूर्ति और आदिनाथ व चंद्रप्रभु भगवान की सफेद संगमरमर की मूर्तियां हैं। चारों तरफ लगे कांच में भगवान के अनंत प्रतिबिंब दिखाई देते हैं। छत पर बनी पेंटिंग और कांच की नक्काशी आज भी रहस्य मानी जाती है। महावीर जयंती पर यहां का सोने का रथ और पालकी निकाली जाती है।
श्रद्धालु और पर्यटकों के लिए जानकारी
कांच मंदिर सिर्फ जैन समाज का ही नहीं, इंदौर का प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां देश-विदेश से लोग आते हैं।
स्थान-सर हुकुमचंद मार्ग, इतवारिया बाजार, राजवाड़ा के पास
दर्शन समय-सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सभी के लिए खुला, शाम 6 बजे के बाद सिर्फ जैन समाज के लिए
टिकट-कोई शुल्क नहीं
नियम-अंदर फोटोग्राफी प्रतिबंधित है, मंदिर में जूते-चप्पल बाहर उतारने होते हैं और शालीन वस्त्र पहनकर आएं।
कैसे पहुंचें- राजवाड़ा, छप्पन दुकान और लालबाग पैलेस के पास होने से ऑटो, ई-रिक्शा से आसानी से पहुंचा जा सकता है।




