झुमरीतिलैया (कोडरमा)। जैन धर्म के पर्वाधिराज दशलक्षण पर्युषण पर्व के छठे दिन जैन धर्मावलंबियों ने उत्तम संयम धर्म एवं धूप दशमी पर्व श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया।
धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहे महासंत जैन मुनि श्री 108 सुयशसागर महाराज ने पीयूष वाणी में कहा कि संयम समझने का नहीं, अंतरंग में उतारने का विषय है। संयम व्यक्ति को पूज्य और वंदनीय बनाता है तथा बिना संयम के मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है।
दूसरों पर नहीं, स्वयं पर नियंत्रण करें
मुनिश्री ने कहा कि दूसरों पर नियंत्रण करने की अपेक्षा स्वयं पर नियंत्रण करना आवश्यक है। जीवन को संयमित एवं नियंत्रित बनाना ही वास्तविक संयम है। मनुष्य को बाहर से नहीं, भीतर से जागने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि इंद्रियों पर नियंत्रण कर, विवेकपूर्वक और यत्नपूर्वक कार्य करने से संयम धर्म धारण होता है। नियम और संयम के साथ जीवन जीना चाहिए। योगी अपने मन को अपने अनुसार चलाता है, जबकि भोगी व्यक्ति मन का गुलाम बनकर जीता है। संसार के बंधनों को तोड़कर ही संयम धर्म की ओर बढ़ा जा सकता है।
दोनों मंदिरों में हुआ धूप विसर्जन
धूप दशमी के अवसर पर सभी शिविरार्थी जुलूस के रूप में पंक्तिबद्ध होकर दोनों मंदिरों में पहुंचे। विश्व शांति मंत्रों के उच्चारण के साथ कर्मों की निर्जरा की मंगल भावना से धूप अग्नि में विसर्जित की गई।
निर्जल उपवास कर रहे व्रतियों को जैन समाज के मंत्री नरेंद्र जैन झांझरी, संयुक्त मंत्री राज जैन छाबड़ा, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र जैन काला, भंडारी सुनील जैन सेठी, मंदिर निर्माण कमेटी के संयोजक सुरेश जैन झांझरी, सुशील जैन छाबड़ा, चातुर्मास कमेटी के सभी संयोजक एवं सहसंयोजक, शिविर संयोजक सिद्धांत जैन सेठी, कुणाल जैन ठोलिया एवं वार्ड पार्षद पिंकी जैन ने नमन कर अनुमोदना की।
अभिषेक और शांतिधारा के पुण्यार्जक
बड़ा मंदिर में मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान के प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा का सौभाग्य सुरेंद्र-सरिता-सौरभ जैन काला परिवार को प्राप्त हुआ।
1008 श्री चंद्रप्रभु भगवान का विहार कराकर उन्हें पांडुकशिला पर विराजमान करने एवं प्रथम कलश शांतिधारा का सौभाग्य कांता देवी, धर्मपत्नी कमलकुमार छाबड़ा के परिवार को मिला। भगवान महावीर स्वामी की शांतिधारा का सौभाग्य भी इसी परिवार को प्राप्त हुआ।
पंडाल परिसर में भगवान चंद्रप्रभु एवं भगवान महावीर स्वामी का श्रीजी विहार कर प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा का सौभाग्य सुशील-ऋषभ-अभिषेक जैन काला एवं मंजू देवी-विक्की जैन बाकलीवाल परिवार, दुर्ग को प्राप्त हुआ।
नया मंदिर में भगवान महावीर स्वामी की शांतिधारा का सौभाग्य सुशील-सुमित-कनिष्क जैन छाबड़ा परिवार एवं शांतिलाल जैन छाबड़ा परिवार को मिला। आदिनाथ भगवान की वेदी पर शांतिधारा करने का सौभाग्य आशीष-अभिषेक-अक्षय जैन गंगवाल परिवार को प्राप्त हुआ।
नन्हे बच्चों ने मोहा मन
रात्रि में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में भाग लिया। बच्चों ने धार्मिक एवं प्रेरणादायक संदेशों से सभी का मन मोह लिया।
श्रीफल साथी : राजकुमार जैन अजमेरा झुमरीतिलैया




