इंदौर। धर्मनगरी इंदौर के लिए यह सौभाग्य का अवसर है कि श्रमण संस्कृति के प्रभावक संत, आचार्य विद्यासागर जी महाराज के सुशिष्य निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज का 44वां मुनि दीक्षा दिवस उनके ससंघ सान्निध्य में मनाया जा रहा है।

मुनिश्री अपनी ओजस्वी वाणी, गहन अध्ययन और जिज्ञासाओं के समाधान के लिए देशभर में विख्यात हैं। उनके प्रवचन जैन धर्म, आध्यात्मिकता और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

जिज्ञासाओं के समाधान से जन-जन तक जिनवाणी

मुनिश्री का बहुचर्चित ‘जिज्ञासा समाधान’ कार्यक्रम प्रतिदिन संध्या जिनवाणी चैनल पर प्रसारित होता है। इसके माध्यम से देश-विदेश में बसे श्रद्धालु उनकी वाणी का लाभ लेते हैं और जीवन से जुड़े धार्मिक प्रश्नों का समाधान प्राप्त करते हैं।

मुनिश्री के मार्गदर्शन में अनेक जैन तीर्थों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार हुआ है। तीर्थोद्धार, धर्म प्रभावना एवं जनजागरण के कार्यों में उनका योगदान समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

युवाओं को धर्म-संस्कारों से जोड़ने का प्रयास

युवाओं के चहेते मुनिश्री ने हजारों युवाओं को प्रतिदिन देवदर्शन, अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा की प्रेरणा दी है। उनके मार्गदर्शन में आयोजित दस दिवसीय श्रावक संस्कार शिविरों में हजारों शिविरार्थी अनुशासन, संयम और साधना के साथ धर्म-संस्कारों की शिक्षा प्राप्त करते हैं।

इन शिविरों का उद्देश्य नई पीढ़ी के जीवन में दया, करुणा, वात्सल्य, संयम और जिनधर्म के संस्कारों को सुदृढ़ करना है।

गृहस्थ जयकुमार से मुनि सुधासागर तक

मुनिश्री का जन्म 21 अगस्त 1958 को सागर जिले के ग्राम इशुरवारा में धर्मनिष्ठ श्रावक श्री रूपचंद जी एवं श्रीमती शांतिबाई के यहां हुआ। गृहस्थ जीवन में उनका नाम जयकुमार था।

उन्होंने 20 वर्ष की आयु में 20 अक्टूबर 1978 को दिगंबर जैन तीर्थ नैनागिर में आचार्य विद्यासागर जी महाराज से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया। वर्ष 1980 में क्षुल्लक दीक्षा, वर्ष 1982 में ऐलक दीक्षा और 29 सितंबर 1983 को मोराजी, सागर में आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज से जैनेश्वरी मुनि दीक्षा ग्रहण की।

तब से मुनिश्री ने पदविहार करते हुए नगर-नगर और डगर-डगर जिनशासन की प्रभावना की तथा असंख्य श्रद्धालुओं के जीवन को धर्म और संस्कारों से जोड़ा।

दीक्षा दिवस पर मंगल भावना

मिनी बुंदेलखंड के रूप में विख्यात छत्रपति नगर में विराजमान मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के 44वें दीक्षा दिवस पर श्रद्धालु उनके चरणों में विनम्र नमोस्तु अर्पित करते हैं। मंगल भावना है कि उनका रत्नत्रय सदैव कुशल-मंगल रहे और दीर्घकाल तक समाज को उनका पावन सान्निध्य एवं आशीर्वाद मिलता रहे।

विशेष लेख : डॉ. जैनेंद्र जैन एवं राजेश जैन दद्दू, इंदौर

श्रीफल साथी : इंदौर