इंदौर। आचार्य श्री आदिसागर अंकलीकर परंपरा की 20वीं सदी की प्रथम गणिनी आर्यिका श्री 105 विजयमति माताजी को समर्पित आर्यिका विजयमति वुमंस फेडरेशन भारत के तत्वावधान में भक्तामर महास्तोत्र पर आधारित दो प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
आयोजन चर्याचक्रवर्ती, चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महामुनिराज के 49वें अवतरण दिवस के शुभ अवसर पर इंद्रपुरी चातुर्मास-2026 के अंतर्गत हुआ। प्रतियोगिताएं गुरु पूर्णिमा से गुरुदेव के अवतरण दिवस तक आयोजित की गईं।
भक्तामर कंठस्थ और लेखन प्रतियोगिता
आयोजकों ने बताया कि पांच से 15 वर्ष आयु वर्ग के लिए भक्तामर कंठस्थ प्रतियोगिता तथा 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लिए भक्तामर लेखन प्रतियोगिता रखी गई। इंदौर नगर के बच्चों एवं बड़ों ने उत्साह के साथ सहभागिता की।
प्रतिभागियों ने भक्तामर स्तोत्र का शुद्ध उच्चारण, लय और भाव के साथ वाचन किया। लेखन प्रतियोगिता में भी प्रतिभागियों ने सुंदर और शुद्ध लेखन प्रस्तुत किया।
देशना जैन का रहा विशेष योगदान
भक्तामर स्तोत्र कंठस्थ कराने में बच्चों के माता-पिता तथा इंदौर निवासी पाठशाला अध्यापिका सुश्री देशना जैन का विशेष योगदान रहा। उन्होंने बच्चों को भक्तामर कंठस्थ कराया और प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
आयोजन में राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती प्रेरणा शाह, राष्ट्रीय मंत्री श्रीमती अंजलि जैन, राष्ट्रीय संगठन संयोजिका श्रीमती तिलकनंदिनी शाह एवं सलाहकार सनत कुमार जैन का विशेष सहयोग रहा। गुरु मां आर्यिका श्री 105 आराध्यमति माताजी के मार्गदर्शन में कार्यक्रम संपन्न हुआ।
विजेताओं को मिले रजत पुरस्कार
भक्तामर लेखन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान श्रीमती प्रीति जैन, द्वितीय स्थान ललित सेठी तथा तृतीय स्थान श्रीमती शशि जैन ने प्राप्त किया।
भक्तामर कंठस्थ प्रतियोगिता में अर्णव जैन प्रथम, मंथन जैन द्वितीय तथा विशुद्धी पाटोदी तृतीय रहे। प्रथम स्थान प्राप्तकर्ताओं को चांदी का कलश, द्वितीय स्थान प्राप्तकर्ताओं को चांदी की जापमाला तथा तृतीय स्थान प्राप्तकर्ताओं को 10 ग्राम चांदी का सिक्का प्रदान किया गया। सभी सहभागियों को पांच-पांच ग्राम चांदी के सिक्के भेंट किए गए।
श्रीफल साथी : श्रीमती तिलकनंदिनी शाह, इंदौर




