देहरा तिजारा। अतिशय क्षेत्र देहरा तिजारा में अष्टम तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 श्री चंद्रप्रभु भगवान का 71वां प्रकट तिथि महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर परम पूज्य भावलिंगी संत दिगम्बराचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज ससंघ 31 पिच्छी का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ। आयोजन ने देहरा में मणि-कांचन संयोग का स्वरूप ले लिया।

1956 में हुआ था भगवान का प्राकट्य

सन 1956 में श्रावण सुदी दशमी के दिन प्रातः 11:55 बजे त्रिलोकीनाथ, हितोपदेशी एवं जैन धर्म के अष्टम तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 श्री चंद्रप्रभु भगवान देहरा-तिजारा की पावन धरा पर भू-गर्भ से प्रकट हुए थे। भगवान के प्राकट्य के बाद से यह क्षेत्र देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। श्रद्धालु यहां पहुंचकर अपने जीवन के रोग, शोक, भय एवं पीड़ा से मुक्ति की कामना करते हैं।

महामस्तकाभिषेक और ध्वजारोहण

मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन और प्रचार मंत्री उमंग जैन ने बताया कि 71वें प्रकट तिथि महोत्सव के अवसर पर प्रातःकाल मूलनायक भगवान श्री चंद्रप्रभु स्वामी का महामस्तकाभिषेक संपन्न हुआ। प्रातः 8 बजे आचार्य संघ की आहारचर्या हुई तथा प्रातः 9:30 बजे अनुष्ठान का ध्वजारोहण किया गया। इसके पश्चात श्री चंद्रप्रभु मंडपम् में प्रातःकालीन धर्मसभा का शुभारंभ हुआ।

धर्मसभा में हुआ चित्र अनावरण

धर्मसभा का चित्रानावरण अरुण मांगी जी प्रधान, रवीन्द्र जैन विशिष्ट, अशोक जैन जयन्ता दिल्ली एवं प्रदीप जैन दिल्ली द्वारा किया गया। वहीं आचार्य गुरुवर के चरणों का प्रक्षालन विशिष्ट रूप से पधारे श्री मान जैन एवं श्री द्वारा किया गया।

भगवान श्री चंद्रप्रभु स्वामी के मस्तक पर प्रथम कलश से अभिषेक करने का परम सौभाग्य भी श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ।

भगवान के प्राकट्य की डॉक्यूमेंट्री दिखाई

आचार्य गुरुवर के मंगल उद्बोधन से पूर्व भगवान श्री चंद्रप्रभु के प्राकट्य से संबंधित डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया गया। जिनागम पंथ चैनल टीम द्वारा तैयार इस फिल्म को श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर देखा।

‘जो आएगा, झोली भरकर ही जाएगा’

आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए भगवान चंद्रप्रभु के प्राकट्य और उनके अतिशय का स्मरण कराया। उन्होंने कहा—

माँ सरस्वती करती दवा, प्रगट हुए चंदा बाबा।

धरती पर अतिशय हाय, फैली शीतल चंद्रमा।

श्रावण सुदी दसमी, हो-हो-2, मंगल कहलाये रे।

जीवन है पानी की बूँद, कब मिट जाये रे।”

उन्होंने कहा कि जब तिजारा नगर के आबाल-वृद्ध बच्चों का पुण्य एकत्रित होकर उदय में आया, तब सम्पूर्ण समाज के पुण्य प्रभाव से अष्टम तीर्थंकर भगवान श्री चंद्रप्रभु स्वामी का प्राकट्य हुआ।

उन्होंने कहा कि बड़े बाबा का प्रकट तिथि महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अवसर है और जो भी भक्त यहां श्रद्धा से आता है, वह अपनी झोली भरकर ही लौटता है।

समाज पदाधिकारियों की सहभागिता

कार्यक्रम में मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, महामंत्री नरेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष शिंभू जैन, प्रचार मंत्री उमंग जैन, चातुर्मास अध्यक्ष सुरेश जैन, पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र जैन, सुरेंद्र जैन, आदिश्वर जैन, रवि जैन एवं नीरज जैन सहित समाज के अनेक पदाधिकारी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि निर्मल जैन, अल्पसंख्यक विभाग, दिल्ली रहे।

जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर

पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह एवं भक्ति का वातावरण बना रहा। मंदिर परिसर भगवान श्री चंद्रप्रभु के जयकारों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने बड़े बाबा के चरणों में श्रद्धा एवं भक्ति अर्पित कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र

भगवान चंद्रप्रभु के प्रकट तिथि महोत्सव ने श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और आत्मकल्याण की भावना से जोड़ा। अतिशय क्षेत्र देहरा तिजारा में आयोजित यह महोत्सव भगवान के प्रति श्रद्धा और क्षेत्र की धार्मिक आस्था का विशेष अवसर बन गया।