Lआगरा। सेक्टर-7, आवास विकास कॉलोनी, सिकंदरा स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आराधना की गई। पं. सिद्धांत शास्त्री के सान्निध्य में श्री पुष्पदंत भगवान एवं आदिनाथ भगवान का अभिषेक किया गया। इसके बाद धर्मप्रेमियों ने संगीतमय पूजन में सहभागिता की।

स्वर्ण कलश से हुआ मूलनायक शांतिनाथ भगवान का अभिषेक

धार्मिक अनुष्ठानों की समस्त क्रियाएं पं. सिद्धांत शास्त्री ने विधि-विधान से संपन्न कराईं। प्रथम चार इंद्रों ने पांडुकशिला पर विराजमान श्रीजी का अभिषेक किया।

इसके बाद मूलनायक भगवान शांतिनाथ का चार इंद्रों द्वारा स्वर्ण कलश से अभिषेक किया गया। आठ इंद्रों ने शांतिधारा करने का पुण्यार्जन प्राप्त किया।

‘अहंकार में व्यक्ति दूसरों को छोटा समझने लगता है’

उत्तम मार्दव धर्म का महत्व बताते हुए पं. सिद्धांत शास्त्री ने कहा कि धन, दौलत, शान और शौकत कई बार व्यक्ति में अहंकार और अभिमान पैदा कर देते हैं। ऐसा व्यक्ति दूसरों को छोटा और स्वयं को सर्वोच्च समझने लगता है।

उन्होंने कहा कि मार्दव धर्म स्वयं की वास्तविक वृत्ति और स्वरूप को समझने का माध्यम है। बाहरी उपलब्धियों और परिग्रह का अहंकार छोड़कर मनुष्य को अपने भीतर देखने का प्रयास करना चाहिए।

‘तप, त्याग और साधना से करें आत्मचिंतन’

पं. सिद्धांत शास्त्री ने कहा कि संसार में प्रत्येक व्यक्ति को एक दिन जाना है, इसलिए परिग्रह के प्रति अत्यधिक आसक्ति के बजाय आत्मस्वरूप को पहचानना आवश्यक है।

उन्होंने श्रद्धालुओं को तप, त्याग और साधना के माध्यम से परिग्रह एवं कषायों को कम करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि आत्मसाधना परम शांति और मोक्षमार्ग की दिशा में आगे बढ़ने का माध्यम है।

समाजजनों ने लिया धर्मलाभ

इस अवसर पर श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन समिति के अध्यक्ष अतुल जैन, मंत्री राकेश जैन, मगन कुमार जैन, प्रवीण जैन, महेश चंद्र जैन, राजेश बैनाड़ा, विजय जैन निमोरब, अरुण जैन, अनिल आदर्श जैन, हेमा जैन, सतीश जैन, राजेंद्र जैन, जितेश जैन, विपुल जैन, मोहित जैन, सिद्धार्थ जैन, प्रशांत जैन, वैभव जैन, दीपेश जैन, चंदन जैन, शुभम जैन, अनंत जैन, विपिन जैन, अभिषेक जैन सहित सकल जैन समाज उपस्थित रहा।

उत्तम आर्जव धर्म पर होंगे धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन

मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि 18 सितंबर 2026 को उत्तम आर्जव धर्म की आराधना के तहत प्रातः अभिषेक एवं पूजन होगा। सायंकाल श्रीजी की आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।