इंदौर। इंदौर के इतिहास में पहली बार आयोजित 458 मंडलीय इंद्रध्वज महामंडल विधान के दूसरे दिन नेमी नगर जैन कॉलोनी में श्रद्धा, भक्ति और धर्ममय वातावरण देखने को मिला। ज्येष्ठाचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज के मंगलमय सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने भक्तिभावपूर्वक विधान में सहभागिता की। इस अवसर पर आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ने भगवान जिनेंद्र की पूजा और भक्ति के महत्त्व को समझाते हुए कहा कि भगवान जिनेंद्र की पूजा न तो अधिकार से मिलती है, न दौलत से और न ही शोहरत से, बल्कि यह सौभाग्य से प्राप्त होती है। गुरुदेव ने कहा कि धन-दौलत और शोहरत वाले संसार में बहुत से लोग हैं, लेकिन हम सौभाग्यशाली हैं कि भगवान की पूजा-अर्चना करने का अवसर प्राप्त हुआ है।
भगवान की भक्ति और सेवा का प्रभाव जीवन में स्वतः दिखाई देता है
इस पूजा और भक्ति के प्रताप को देखिए कि जिन युवाओं और बच्चों की धर्म में रुचि नहीं है, उन्हें भी यदि दस मिनट के लिए यहां लाकर इस भक्तिमय वातावरण से परिचित कराया जाए, तो उनके भीतर भी धर्म के प्रति रुचि जागृत हो सकती है और वे धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं। आचार्यश्री ने कहा कि भगवान की भक्ति और सेवा का प्रभाव जीवन में स्वतः दिखाई देता है। ऐसे दिव्य दृश्य देखने के लिए अपने जैन समाज से बाहर के बंधु-मित्रों को भी विधान में आमंत्रित करना चाहिए, ताकि वे समझ सकें कि भगवान की पूजा कैसे होती है और सच्ची भक्ति का स्वरूप क्या है। उन्होंने कहा कि हम भगवान की भक्ति किसी सांसारिक वस्तु को मांगने के लिए नहीं करते, लेकिन जब निस्वार्थ भाव से पूजा और आराधना करते हैं, तो बिना मांगे ही जीवन में बहुत कुछ प्राप्त हो जाता है।
श्रद्धालुओं की शंकाओं का हुआ समाधान
विधान के दूसरे दिन सायंकालीन बेला में गुरुदेव के श्रीमुख से श्रद्धालुओं की शंकाओं का समाधान हुआ। इसके बाद गुरुदेव की मंगलमय आरती संपन्न हुई। संपूर्ण आयोजन में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर धर्म, भक्ति और जिनेंद्र आराधना के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।




