मुरैना/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार, 11 अक्टूबर को मेडिटेशन गुरु उपाध्यायश्री 108 विहसंतसागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में भव्य सरस्वती महाअर्चना एवं श्रुत स्कंध विधान आयोजित हुआ। श्री आनंदमय पावन वर्षायोग समिति, लखनऊ के तत्वावधान में स्मृति उपवन में हुए इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
आयोजन में ज्ञान की आराध्य देवी मां सरस्वती की महाअर्चना के माध्यम से जिनवाणी, शास्त्रों और आध्यात्मिक ज्ञान के प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई।
ज्ञान, संस्कार और नैतिकता का संदेश
समाधिस्थ गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज के प्रभावक एवं आज्ञानुवर्ती शिष्य उपाध्यायश्री विहसंतसागर जी महाराज ने गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि सरस्वती महाअर्चना जैसे आयोजन केवल पूजन तक सीमित नहीं हैं। ये समाज में ज्ञान, संस्कार, नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का माध्यम हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को धर्मग्रंथों, जिनवाणी और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है। श्रद्धालुओं ने धर्ममय जीवन, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
शिक्षाचार्यों ने संपन्न कराईं विधान की क्रियाएं
विधानाचार्य डॉ. अभिषेक जैन शिक्षाचार्य एवं डॉ. आशीष जैन शिक्षाचार्य, दमोह ने विधान की धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराईं। समिति पदाधिकारियों और समाज के कार्यकर्ताओं ने आयोजन व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
मुख्य मंगल कलश डॉ. वैभव-डॉ. गुंजन जैन ने स्थापित किया। मंगल कलश स्थापना का सौभाग्य डॉ. रमेश जैन, टीकमगढ़, सुरभि-प्रिंस जैन, सोम्या-विपिन जैन एवं ज्ञानमाला जैन को प्राप्त हुआ।
विभिन्न पुण्यार्जकों को मिला सौभाग्य
समारोह गौरव के रूप में श्रीमती सपना-मनीष गोधा ने सहभागिता की। दीप प्रज्ज्वलन श्रीमती कुसुम-अभय शाह ने किया। द्रव्यदानदाता के रूप में श्रीमती कुसुमलता-महावीर प्रसाद गंगवाल का सहयोग रहा।
चित्र अनावरण श्रीमती मोहिनी-ललित जैन ने किया, जबकि मंडप उद्घाटन का सौभाग्य बाबू कैलाशचंद जैन को प्राप्त हुआ। शास्त्र भेंट श्रीमती सुनीता-राजेश जैन तथा ध्वजारोहण श्रीमती आशु-नीरज जैन द्वारा किया गया।
सौधर्म इंद्र के रूप में श्रीमती नीना-संजय गोधा, चक्रवर्ती के रूप में विकास जैन परिवार, कुबेर इंद्र के रूप में श्रीमती शिखा-अमृत जैन परिवार तथा महायज्ञनायक के रूप में श्रीमती छाया-निर्मल जैन, आशियाना को सौभाग्य प्राप्त हुआ।
प्रतिमा दर्शन के दौरान गुंजायमान हुआ पंडाल
सूत्रों के अनुसार उपाध्यायश्री विहसंतसागर जी महाराज के पास मां सरस्वती की लगभग 1200 वर्ष प्राचीन प्रतिमा है, जिसका दर्शन वर्ष में एक बार सरस्वती महाअर्चना के समय कराया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धालु इसे अतिशयकारी प्रतिमा के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजते हैं।
आयोजकों के अनुसार मुरैना, ग्वालियर, अंबाह, गोरमी, मुरार, पोरसा, भिंड, आगरा, शिवपुरी सहित अनेक स्थानों से पांच हजार से अधिक गुरु भक्त पहुंचे। श्रद्धालुओं ने अष्टद्रव्य और श्रीफल सहित अर्घ्य समर्पित किए। प्रतिमा दर्शन के समय तालियों एवं घंटा-झालर की ध्वनि से पंडाल गुंजायमान हो उठा।
श्रीफल साथी : मनोज जैन नायक, मुरैना





