इंदौर। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गणितज्ञ एवं भारतीय इतिहास परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. अनुपम जैन ने श्रीलंका के पेराडेनिया विश्वविद्यालय के आमंत्रण पर आयोजित प्राचीन भारतीय गणित विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेकर भारत की समृद्ध गणितीय परंपरा का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया।
अप्रकाशित पांडुलिपियों पर रखा शोध
डॉ. जैन ने अपने व्याख्यान में भारत की कई अप्रकाशित गणितीय पांडुलिपियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने लगभग एक दर्जन प्राचीन गणितीय पांडुलिपियों तथा उनकी विषय-वस्तु का विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए भारतीय गणित की ऐतिहासिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से रखा।
व्याख्यान को मिली सराहना
व्याख्यान के उपरांत उपस्थित विद्वानों ने करतल ध्वनि के साथ डॉ. अनुपम जैन का अभिनंदन किया। सम्मेलन में उन्हें आचार्य श्रीधर कृत 'त्रिशतिका' के संपूर्ण पाठ का सानुवाद सहित प्रकाशन करने का महत्वपूर्ण दायित्व भी सौंपा गया।
भारत लौटने पर हुआ सम्मान
छह दिवसीय श्रीलंका प्रवास के बाद भारत लौटने पर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई, डाटा विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. गोविंद माहेश्वरी तथा विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों ने डॉ. जैन का सम्मान कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
भारतीय ज्ञान परंपरा को मिली नई पहचान
डॉ. अनुपम जैन का यह व्याख्यान भारतीय गणितीय परंपरा, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण तथा वैश्विक स्तर पर भारतीय ज्ञान-विज्ञान की प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।



