कुण्डलपुर (दमोह)। वीर शासन जयंती एवं चातुर्मास वर्षायोग के पावन अवसर पर आयोजित विशाल धर्मसभा में निर्यापक श्रमण मुनि श्री समता सागर महाराज ने कहा कि तीर्थंकर भगवानों का महत्व केवल उनके मोक्ष प्राप्त करने में नहीं, बल्कि अनगिनत जीवों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने में है। भगवान महावीर की प्रथम दिव्य देशना से वीर शासन का शुभारंभ हुआ, जिसकी स्मृति में प्रतिवर्ष वीर शासन जयंती मनाई जाती है।
धर्म का आधार सम्यक दर्शन, ज्ञान और चारित्र
मुनि श्री ने कहा कि धर्म बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि आत्मा के विशुद्ध परिणामों का नाम है। धर्म का वास्तविक स्वरूप सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र में निहित है। उन्होंने कहा कि सही श्रद्धा, सही ज्ञान और श्रेष्ठ आचरण के समन्वय से ही सम्यक्त्व की प्राप्ति संभव है।
आत्मज्ञान ही वास्तविक सम्यक ज्ञान
सम्यक ज्ञान की व्याख्या करते हुए मुनि श्री ने कहा कि संसार में अनेक प्रकार की जानकारियाँ उपलब्ध हैं, लेकिन आत्मा और परमार्थ का ज्ञान ही वास्तविक सम्यक ज्ञान है। उन्होंने कहा कि भौतिक ज्ञान उपयोगी अवश्य है, किंतु आत्मज्ञान के बिना जीवन अधूरा रहता है।
चातुर्मास समाज के आध्यात्मिक जागरण का महापर्व
उन्होंने कहा कि चातुर्मास केवल संतों के एक स्थान पर ठहरने का समय नहीं, बल्कि समाज के आध्यात्मिक जागरण का महापर्व है। जहाँ दिगंबर पिच्छीधारी संत वर्षायोग स्थापित करते हैं, वहाँ धर्म, स्वाध्याय, संयम और संस्कार का वातावरण निर्मित हो जाता है तथा समाज में नई आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है।
संतों का सान्निध्य ही प्रतिदिन दीपावली और दशहरा
मराठी उक्ति "संत साधू एती घरा, तोची दिवाली दशहरा" का उल्लेख करते हुए मुनि श्री ने कहा कि जिस नगर या ग्राम में संतों का चातुर्मास होता है, वहाँ प्रत्येक दिन दीपावली और दशहरे जैसा आनंद अनुभव होता है। संतों का त्याग, तप, स्वाध्याय और संयम समाज के लिए सबसे बड़ा उत्सव है।
श्रद्धा और समर्पण से मिलता है आध्यात्मिक वैभव
मुनि श्री ने श्रद्धालुओं से बड़े बाबा के चरणों में निष्कपट श्रद्धा और समर्पण रखने का आह्वान करते हुए कहा कि भगवान की भक्ति जीवन की बाधाओं को दूर करने की शक्ति रखती है। जो श्रद्धा और समर्पण के साथ आते हैं, वे आध्यात्मिक संपदा से परिपूर्ण होकर लौटते हैं।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लिया धर्ममय जीवन का संकल्प
राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन 'विद्यावाणी' एवं क्षेत्र समिति के प्रचारमंत्री जयकुमार जैन 'जलज' ने बताया कि धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर मुनि श्री के प्रेरणादायी उद्बोधन का श्रवण किया तथा आत्मशुद्धि, स्वाध्याय, संयम और धर्ममय जीवन जीने का संकल्प लिया।



