एटा। पुरानी बस्ती स्थित श्री दिगंबर जैन बड़े मंदिर में विराजमान जागृतिकारी संत आचार्य श्री 108 नयन सागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मन से उत्साहपूर्वक की गई क्रिया ही श्रेष्ठ परिणाम देती है। आत्मकल्याण के लिए श्रद्धा, साधना और मंत्र जाप आवश्यक हैं।
णमोकार मंत्र आत्मशुद्धि का साधन
आचार्यश्री ने कहा कि 'मंत्र' का अर्थ मन को नियंत्रित करना है। णमोकार मंत्र साधना का सर्वोत्तम साधन है, जो आत्मा को शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि घर-घर धर्म चर्चा होने से वातावरण पवित्र बनता है और प्रत्येक घर मंदिर के समान बन सकता है।
मनुष्य पर्याय आत्मदर्शन का अवसर
उन्होंने कहा कि मंदिर समवसरण का प्रतीक है, जहां आने वाला व्यक्ति राग-द्वेष से मुक्त होने का प्रयास करता है। मनुष्य पर्याय एक जंक्शन है, जिसका उद्देश्य आत्मदर्शन और आत्मकल्याण है। यदि एक मेंढक प्रभु भक्ति के भाव से देवगति प्राप्त कर सकता है, तो मनुष्य संयम धारण कर भगवान बनने की क्षमता रखता है।
क्षमा और आत्मसौंदर्य का संदेश
आचार्यश्री ने कहा कि पहले दूसरों को क्षमा करें, फिर स्वयं क्षमा मांगें। यही सच्ची क्षमायाचना है। उन्होंने बाहरी सौंदर्य की अपेक्षा आत्मा के सौंदर्यीकरण पर अधिक बल देते हुए सभी को सद्भाव और आत्मचिंतन का संदेश दिया।
भक्ति कार्यक्रम एवं श्रद्धालुओं की सहभागिता
कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती राजकुमारी जैन ने भजन के माध्यम से मंगलाचरण प्रस्तुत कर किया। सायंकालीन आरती एवं गुरु भक्ति में बाल श्रद्धालुओं ने भजनों के माध्यम से अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी। संचालन पंकज जैन ने किया। इस अवसर पर समाज के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
2 अगस्त को होगा मंगल कलश स्थापना समारोह
मीडिया प्रभारी सुनील जैन बांदा ने बताया कि आचार्य श्री के 34वें वर्षायोग के मंगल कलश स्थापना समारोह का आयोजन 2 अगस्त को दोपहर 12 बजे जनेश्वर मिश्र हॉल, एटा में किया जाएगा। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से समय पर बड़े मंदिर पहुंचकर आचार्यश्री के साथ शोभायात्रा में सम्मिलित होने का आग्रह किया।



