आगरा। नगर के निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला में रक्षा बंधन पर्व अत्यंत भक्तिभाव, श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया गया। शुक्रवार को आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री समत्व सागर महाराज जी, मुनि श्री शील सागर जी, मुनि श्री सुप्रभात सागर जी संघ के सानिध्य में पार्श्वनाथ भगवान का अभिषेक हुआ और शांतिधारा और रक्षाबंधन पर्व को श्रमण संस्कृति रक्षा के रूप में मनाया गया। मुनि श्री समत्व सागर जी ने धर्मसभा में कहा कि आज रक्षा बंधन के दिन मुनिश्री विष्णुकुमार ने 700 मुनियों का उपसर्ग दूर किया था। एक राजा के राज्य में चार मंत्री थे। उन मंत्रियों ने 700 मुनिराजों को बंधक बनाकर उन पर उपसर्ग किया। 700 मुनिराजों को एक जगह बिठाकर वहां पर अग्नि जला दी गई। उधर, मुनिश्री विष्णुकुमार को अपनी रिद्धियों से ज्ञात हुआ। इस राज्य में 700 मुनिराजों पर उपसर्ग किया गया। तब मुनिश्री विष्णुकुमार मुनि ने वहां पहुंचकर 700 मुनियों के उपसर्ग का निवारण किया।

डरा हुआ व्यक्ति कभी सत्य नहीं सोच पाता

मुनिश्री ने कहा कि आज जो वात्सल्य पर्व है और उस भय ने कितने अनर्थ किए हैं, यह बात भी आपको समझ लेना चाहिए। जब भी व्यक्ति भयभीत होता है, वह कुछ भी करने तैयार हो जाता है क्योंकि, अंदर से डरा हुआ व्यक्ति कभी सत्य नहीं सोच पाता है। सही दिशा की ओर नहीं सोच पाता है। यही तो हुआ था-वह बलि मंत्री, जिन्होंने मुनिराज पर आक्रमण कर दिया था। क्यों? हारा हुआ व्यक्ति अपना आपा खो बैठता है, अनर्थ कर देता है। देखिए दो चीजें हैं-असफलता में उसने कितना अनर्थ किया। वह कहानी आपने सभी ने सुनी है, जो वात्सल्य पर्व, जो रक्षाबंधन पर्व की है। बलि मंत्री आदि जो चार मंत्री थे, उज्जैन नगर की यह कहानी है। उज्जैनी नगरी, मालवा का वह प्रसिद्ध, वैभवपूर्ण साम्राज्य जहां पर कभी अकंपनाचार्य आदि 700 मुनिराज आए थे।

बके भाग्य में कहाँ होता है दिगंबर योगियों के दर्शन कर पाना

उन 700 मुनिराजों को आए देखकर नगर में हाहाकार थी। तीन मुनिराज आपके नगर में आए, तो आपको कितना आनंद आता है! सोचिए, 700 मुनिराज! 700 मुनिराज नगर के पास वाले उद्यान में विराजमान हों, नगर में तो हलचल हो गई थी। पूर्व से तैयारियाँ थीं, खूब वैभव और महोत्सव मन रहा था, क्योंकि 700 मुनिराजों का आगमन हो रहा है। आज की ही स्थिति नहीं है, जैसा भव्य अगवानी आप करते हैं, पूर्व में भी राजे-महाराजाओं के शासन में पूरी प्रजा उन मुनिराजों को लेने पहुँच गई लेकिन, सबके भाग्य में कहाँ होता है दिगंबर योगियों के दर्शन कर पाना।

दिगंबर योगी तो है जो ना किसी से डरता है, ना किसी को डराता है

सबकी बुद्धि कहाँ चल पाती है कि मैं भी दिगंबर मुनियों को श्रद्धा से देख सकूँ? जिनके अंदर कोई राग-द्वेष नहीं है, जो कभी राग-द्वेष को नहीं सिखाते, फिर भी लोग उनके प्रति राग-द्वेष रख लेते हैं। एक दिगंबर योगी तो है जो ना किसी से डरता है, ना किसी को डराता है; ना किसी से भय खाता है, ना भयभीत करता है; और ना किसी से राग करता है, ना द्वेष करता है। वह तो प्राणी मात्र के लिए एक दृष्टि से देखता है, उसी का नाम दिगंबर योगी हुआ करता है। मंच संचालन सतेंद्र जैन साहूला ने किया।

कार्यक्रम में यह सभी समाजजन मौजूद रहे

इस मौके पर श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के मनोज जैन, रमेश जैन, प्रवीण जैन (पद्मावती), आनंद जैन, शैलेश जैन (लाला जी), मुरारी लाल जैन, मुकेश जैन, रमेश जैन, आशीष जैन, विवेक जैन, चक्रेश जैन, सतेंद्र जैन (साहुल)आशीष जैन (बाबा), राजीव जैन, सचिन जैन (तार), आशु (वीके), रोहित जैन,नितिन, सनी, अनिकेत, दीपक जैन, हेमंत जैन, अनंत जैन ,गौरव जैन, अमित जैन, पंकज जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन समस्त मंडल एवं सकल जैन समाज मौजूद था।