न्याय नीति से कमाया गया धन दान के योग्य: जैन पाठशाला की छात्रों को जीवन में संस्कारवान होने का मार्ग बताया

आचार्य विभव सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिकाश्री सिद्धमती माताजी संघ सहित नगर में विराजमान हैं। प्रतिदिन प्रातः शांतिधारा अभिषेक के बाद उपदेश के माध्यम से मंगल प्रवचन का लाभ धर्म प्रेमी बंधु ले रहे हैं। नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की रिपोर्ट...
नौगामा। आचार्य विभव सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिकाश्री सिद्धमती माताजी संघ सहित नगर में विराजमान हैं। प्रतिदिन प्रातः शांतिधारा अभिषेक के बाद उपदेश के माध्यम से मंगल प्रवचन का लाभ धर्म प्रेमी बंधु ले रहे हैं। शुक्रवार को माताजी ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि यदि कोई व्यक्ति तन पर कीचड़ लेपता फिर कर लूं स्नान इस प्रकार की जिसकी बुद्धि हो वह वास्तविक काम नहीं है। पहले लूटपाट से धन कमाता है, अनीति से धन कमाता है और फिर कहता है मैं इसको दान कर दूं तो मुझे पुण्य मिलेगा। वह उसकी गलत सोच है, उसे कोई फायदा नहीं मिल सकता है। न्याय नीति से कमाया गया धन ही वास्तविक दान का कारण है। इसलिए हमें अपने धन का उपार्जन न्याय से नीति से और भक्ष आदि सामग्री के माध्यम से ही धन उपार्जन करना चाहिए। वही दान देना चाहिए, उसकी ही जीवन में सार्थकता है अन्यथा वह पाप का ही कार्य है। शाम को आचार्य भक्ति के बाद जैन पाठशाला की छात्रों को जीवन में संस्कारवान होने का मार्ग बताया।
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