सनावद, 17 सितंबर। दिगंबर जैन समाज के दस दिवसीय पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के द्वितीय दिवस पर आचार्य श्री शांतिसागर वर्धमान देशना संत निलय, बड़ा मंदिर सनावद में उत्तम मार्दव धर्म की आराधना की गई। परम पूज्य पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज के संघस्थ बाल ब्रह्मचारी संजय भैया जी के पावन सान्निध्य में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान एवं धर्मसभा आयोजित हुई।
पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा से हुई शुरुआत
सन्मति जैन ने बताया कि प्रातःकाल जिनेंद्र देव का पंचामृत अभिषेक, शांतिधारा एवं संगीतमय पूजन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। पूर्ण सुगंधित कलश करने का सौभाग्य कैलाशचंद, ललित कुमार एवं मनोज चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ। शांतिधारा का सौभाग्य मनीष कुमार एवं आशीष चौधरी परिवार को मिला।
पूजन के पश्चात धर्मसभा का शुभारंभ ऋतु पांड्या ने मंगलाचरण से किया। भगवान महावीर स्वामी के चित्र के समक्ष अरविंद कुमार जैन, कमलचंद जटाले एवं सत्येंद्र कुमार जैन ने दीप प्रज्वलित किया।
मान कषाय आत्मा का बड़ा शत्रु—ब्र. संजय भैया
धर्मसभा को संबोधित करते हुए ब्र. संजय भैया ने कहा कि मार्दव धर्म का अर्थ कोमलता, विनम्रता और अहंकार का त्याग है। मान कषाय आत्मा का बड़ा शत्रु है। उत्तम मार्दव धर्म हमें अपने ज्ञान, धन, रूप और कुल का अभिमान नहीं करने की शिक्षा देता है।
उन्होंने कहा कि विनम्रता व्यक्ति के ज्ञान और व्यक्तित्व को सार्थक बनाती है। सच्चा ज्ञानी वही है, जिसके जीवन और व्यवहार में विनय दिखाई देता है।
संध्या में श्रीजी की आरती, भक्ति एवं प्रवचन के साथ द्वितीय दिवस के धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
18 सितंबर को मनाया जाएगा आचार्य वर्धमानसागर जी का 77वां अवतरण दिवस
सन्मति जैन ने बताया कि शुक्रवार, 18 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल सप्तमी के अवसर पर नगर गौरव वात्सल्य वारिधि आचार्य रत्न श्री वर्धमानसागर जी महाराज का 77वां अवतरण दिवस हर्षोल्लास से मनाया जाएगा।
दोपहर में ब्र. संजय भैया जी के निर्देशन में विनयांजलि सभा आयोजित होगी। इसके बाद सामूहिक पूजन एवं प्रभावना वितरण किया जाएगा।




