कल्याण मंदिर विधान श्रद्धा और भक्ति भाव से किया : 44 अर्घ्य अखंड महामंडल विधान भगवान पार्श्वनाथ को समर्पित

नगर में अक्षय तृतीया के मंगल अवसर पर पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर के मंगल आशीर्वाद से श्री कल्याण मंदिर विधान का आयोजन भक्ति भाव से किया गया। सुबह श्रीजी के अभिषेक, शांतिधारा पूजन के बाद श्री कल्याण मंदिर विधान का संगीतमय वाचन पं.कमल कुमार शास्त्री एवं सुधांशु जैन के कुशल निर्देशन में हुआ। लार से पढ़िए, यह खबर...
लार। नगर में अक्षय तृतीया के मंगल अवसर पर पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर के मंगल आशीर्वाद से श्री कल्याण मंदिर विधान का आयोजन भक्ति भाव से किया गया। सुबह श्रीजी के अभिषेक, शांतिधारा पूजन के बाद श्री कल्याण मंदिर विधान का संगीतमय वाचन पं.कमल कुमार शास्त्री एवं सुधांशु जैन के कुशल निर्देशन में हुआ। कल्याण मंदिर विधान दिगंबर जैन समाज का एक प्रमुख 44 अर्घ्य अखंड महामंडल विधान है, जो भगवान पार्श्वनाथ को समर्पित है। इसका मुख्य उद्देश्य कल्याण और शांति की प्राप्ति है। कल्याण मंदिर विधान, कुमुदचंद्र आचार्य द्वारा रचित 44 स्तोत्रों पर आधारित है। जिसका समापन विशेष पूजा, अर्घ्य और पूजन के साथ किया जाता है। इस अवसर पर सूर्य प्रकाश मिश्रा, अरविंद्र सिंह बुंदेला, वीरेंद्र सापोन, महेश भगवा, राजेश जैन प्राचार्य, महेंद्र जैन दददा, विजय जैन लल्लू, दिनेश जैन, पुष्पेंद्र सिंघई, सौरभ जैन, प्रदीप जैन शामिल हुए।
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