सनावद। पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म की आराधना के साथ सुगंध दशमी अर्थात धूप दशमी का पर्व बड़े उत्साह और भक्तिभाव से मनाया गया।
अभिषेक और शांतिधारा का सौभाग्य
श्रीफल साथी सन्मति जैन काका ने बताया कि प्रातःकाल बड़े मंदिर जी एवं संत निलय में पंचामृत अभिषेक एवं पूजन किया गया। पूर्ण सुगंधित जल कलश करने का सौभाग्य अनंत कुमार, प्रकाश जैन एवं प्रकाश उपभोक्ता भंडार को प्राप्त हुआ।
शांतिधारा का सौभाग्य नमन भैया, संयम, श्रीकांत, सुदेश एवं कमलचंद जटाले परिवार को मिला। पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में बड़ा अभिषेक करने का सौभाग्य कल्याण कुमार, कमल एवं हर्षिल केके परिवार को प्राप्त हुआ।
प्राणी रक्षा और इंद्रिय संयम का संदेश
पूजन के पश्चात धर्मसभा में ब्रह्मचारी संजय भैया ने उत्तम संयम धर्म पर अमृतवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि प्राणी-रक्षण और इंद्रियों का दमन करना ही संयम है।
उन्होंने कहा कि स्पर्शन, रसना, घ्राण, नेत्र, कर्ण और मन पर नियंत्रण रखना इंद्रिय संयम है। पृथ्वीकाय, जलकाय, अग्निकाय, वायुकाय, वनस्पतिकाय एवं त्रसकाय जीवों की रक्षा करना प्राणी संयम है। इन दोनों में इंद्रिय संयम प्रमुख है, क्योंकि इंद्रिय संयम ही प्राणी संयम का कारण बनता है।
सुगंध दशमी पर धूप खेवन
सायंकाल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशमी पर सुगंध दशमी का पर्व मनाया गया। जैन मान्यताओं के अनुसार पर्युषण पर्व में आने वाली सुगंध दशमी का विशेष महत्व है। इस व्रत को विधिपूर्वक करने से अशुभ कर्मों का क्षय और पुण्य बंध की मंगल भावना होती है।
श्रद्धालुओं ने विभिन्न जैन मंदिरों में भगवान को धूप अर्पित की, जिसे धूप खेवन भी कहा जाता है। इससे वातावरण सुगंधमय एवं भक्तिमय हो उठा।
सनावद के सभी जैन मंदिरों सहित णमोकार धाम, सिद्धाचल पोदनपुरम एवं ओंकारबाग मोरटक्का में समाजजनों ने श्रद्धापूर्वक धूप खेवन कर धूप दशमी का पर्व मनाया।
श्रीफल साथी : सन्मति जैन काका, सनावद




