सनावद। प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री 108 शांतिसागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश, राष्ट्र गौरव, वात्सल्य वारिधि, तपोनिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज का 77वां वर्षवर्धन दिवस सनावद में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। विभिन्न धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में समाजजनों ने सहभागिता की।
पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा से हुई शुरुआत
श्रीफल साथी सन्मति जैन काका ने बताया कि 18 सितंबर को प्रातः बड़ा जैन मंदिर एवं संत निलय में पंचामृत अभिषेक और पूजन किया गया। शांतिधारा का पुण्यार्जन सुरेश कुमार, मनीष कुमार एवं हितेश कुमार पांड्या, अमर ज्योति बस परिवार को प्राप्त हुआ।
संगीतमय पूजन में समर्पित किए अर्घ्य
दोपहर में संत निलय में आयोजित धर्मसभा का शुभारंभ आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। ब्रह्मचारी संजय भैया, संतोष बाकलीवाल, वीरेंद्र बाबा, सरल जटाले एवं इंदर चंद सराफ ने दीप प्रज्ज्वलित किया। संगीता पाटोदी ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। इसके बाद विभिन्न परिवारों ने आचार्यश्री की संगीतमय पूजन कर श्रद्धापूर्वक अर्घ्य समर्पित किए।
‘तप, वात्सल्य और ज्ञान की खान हैं आचार्यश्री’
विनयांजलि सभा में ब्रह्मचारी संजय भैया इटारसी ने कहा कि नगर गौरव आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज तप, वात्सल्य और ज्ञान के धनी हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार राम के साथ लक्ष्मण की छाया चलती थी, उसी प्रकार आचार्यश्री के पीछे उनके संघ के साधु धर्म प्रभावना करते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सनावद का यह सौभाग्य है कि यहां जन्मे आचार्यश्री आज भी अपने गुरुओं की चर्या और आचार्य शांतिसागर जी की परंपरा का निर्वहन करते हुए विशाल संघ का कुशलतापूर्वक संचालन कर रहे हैं।
गवाक्षी जैन सहित समाजजनों ने दी विनयांजलि
आचार्यश्री के प्रति गवाक्षी जैन, संगीता पाटोदी, डॉ. राहुल स्वस्तिक एवं निकिता सराफ ने भी विनयांजलि अर्पित कर उनके व्यक्तित्व और साधना को स्मरण किया।
कार्यक्रम का संचालन प्रशांत चौधरी ने किया। कार्यक्रम के बाद कुसुम कुमार, हेमंत कुमार एवं सन्मति जैन काका परिवार की ओर से प्रभावना वितरित की गई।
77 दीपों से की आचार्यश्री की मंगल आरती
सायंकाल श्रीजी एवं आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज की 77 दीपों से मंगल आरती की गई। प्रदीप पंचोलिया, प्रशांत चौधरी, प्रांशुल पंचोलिया, संगीता पाटोदी एवं महिमा जैन ने भक्ति और आरती कराई।
आचार्य वर्धमान सागर बहु मंडल की ओर से नैवेद्य सजाओ प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।
सनावद में हुआ था यशवंत कुमार के रूप में जन्म
आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज का जन्म 18 सितंबर 1950 को भाद्रपद शुक्ल सप्तमी के दिन सनावद में यशवंत कुमार के रूप में हुआ। उनके पिता कमलचंद जी एवं माता मनोरमा देवी थीं।
सनावद सिद्धक्षेत्र सिद्धवरकूट, पावागिरि ऊन और सिद्धक्षेत्र चूलगिरि बावनगजा जैसे जैन तीर्थों के निकट स्थित है।
युवावस्था में ही बढ़े संयम के मार्ग पर
आचार्यश्री ने वर्ष 1967 में सिद्धक्षेत्र मुक्तागिरि में आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी से आजीवन शूद्र जल त्याग एवं पांच वर्ष का ब्रह्मचर्य व्रत लिया। इसके बाद युवावस्था में ही संयम के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए मुनि दीक्षा ग्रहण की।
श्रवणबेलगोला में 12 वर्ष में आयोजित होने वाले भगवान बाहुबली के महामस्तकाभिषेक में भी आचार्यश्री का सान्निध्य रहा है। वर्तमान में वे विशाल संघ सहित सीकर, राजस्थान में विराजमान हैं।




