मुरैना/अम्बाह। जैन बगीची अम्बाह में चातुर्मासरत गणिनी आर्यिका श्री संगममति माताजी ने कहा कि धार्मिक आराधना का उद्देश्य केवल बाहरी अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, इंद्रिय संयम और जीवन में सदाचार को अपनाना है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि का जैन धर्म में विशेष महत्व है। इस अवसर पर उपवास, संयम एवं धार्मिक साधना के माध्यम से आत्मकल्याण की भावना को मजबूत किया जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धापूर्वक सहभागी बनकर संयम एवं सदाचार को जीवन में उतारने का आह्वान किया। जैन बगीची प्रांगण में आचार्य श्री सिद्धांत सागर महाराज की शिष्या गणिनी आर्यिका श्री संगममति माताजी ससंघ के मंगल सान्निध्य में चल रहे 35 दिवसीय णमोकार महामंत्र जाप अनुष्ठान के अंतर्गत भव्य धार्मिक आयोजन हुआ। इस दौरान नगर में निकली णमोकार महामंत्र की आरती यात्रा में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और जगह-जगह पुष्पवर्षा कर धर्ममय वातावरण बना दिया।

नगर में निकली भव्य आरती यात्रा

णमोकार महामंत्र के पुण्यार्जक परिवार शकुंतला देवी जैन धर्मपत्नी स्व. खूबचंद जैन, दिलीप कुमार मीना जैन, हेमंत कुमार चंचल जैन, अभिलाष कुमार शिवानी जैन, अमन जैन, सिद्धार्थ जैन एवं समस्त चडोसिया परिवार, अम्बाह की ओर से भव्य णमोकार महामंत्र आरती की गई। आरती शोभा यात्रा नगर पालिका चौराहे से प्रारंभ होकर जश्ववर रोड, परेड चौराहा होते हुए जैन बगीची प्रांगण पहुंची। मार्ग में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से आरती की तथा जगह-जगह पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। श्रद्धालुओं की उपस्थिति और धार्मिक जयघोष से पूरा मार्ग भक्तिमय नजर आया।

एक घंटे तक गूंजा णमोकार महामंत्र

जैन बगीची प्रांगण में पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से श्रीजी की आरती की। इसके पश्चात करीब एक घंटे तक सामूहिक रूप से णमोकार महामंत्र का जाप किया गया। महामंत्र की सामूहिक गूंज से पूरा जैन बगीची प्रांगण आध्यात्मिक वातावरण में डूब गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव के साथ जाप अनुष्ठान में सहभागिता की।

धर्म और साधना में उमड़ा जनसमूह

35 दिवसीय णमोकार महामंत्र जाप अनुष्ठान में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान महिला-पुरुष, युवा, बच्चे एवं बुजुर्ग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सामूहिक जाप के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने णमोकार महामंत्र का जाप करते हुए आत्मशुद्धि, संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया ।