कारीटोरन। भारत वर्षीय दिगंबर जैन आगम मार्गी विद्वत समिति एवं श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कारीटोरन के तत्वावधान में सात दिवसीय प्रतिष्ठा शिरोमणि ग्रंथ कार्यशाला उत्तर प्रदेश के ललितपुर के कारीटोरन के शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में गुरुवार से प्रारंभ हुई। जो 9 सितम्बर तक चलेगी। आगममार्गी विद्धत संघ के प्रचार प्रसार सचिव प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया ने बताया कि जैन समाज के इतिहास में उत्तर भारत में 900 वर्ष के इतिहास में यह पहला आयोजन हो रहा है। जहां भारत भर के 100 से अधिक विद्वान भाग ले रहे हैं। इसके मुख्य संचालक ज्योतिषाचार्य पंडित महेश कुमार डीमापुर हैं। जिन्हें देशभर में 100 से अधिक पंचकल्याणक कराने का अनुभव है।

विद्वानों के ग्रंथों का शोध परक अध्ययन होग

यह कार्यक्रम उत्तर एवं दक्षिण भारत सहित देश भर के विद्वान प्रतिष्ठाचार्यों के सानिध्य में हो रहा है। इस दौरान अतिशय क्षेत्र के प्रांगण में शिलालेख स्थापित होगा, जो सदियों तक कार्यशाला की गाथा को संरक्षित रखेगा। यहां 20 हस्तलिखित ताड पत्रीय एवं 21 प्रकाशित पूर्वाचार्यों एवं विद्वानों के ग्रंथों का शोध परक अध्ययन होगा। दिगंबर जैन आगम मार्गी विद्वत समिति की भावना है कि जो अप्रकाशित प्रतिष्ठा ग्रंथ है उनका विधिवत प्रकाशन हो। जैन धर्म की अमूल्य धरोहर को युगों के लिए संरक्षित करने के लिए यह किया जा रहा है।

इनकी होगी सहभगिता

इस दौरान 18 अप्रकाशित पूर्व आचार्यों एवं विद्वानों के द्वारा रचित हस्तलिखित ताड पत्रीय ग्रंथ जो कि लगभग पांचवीं शताब्दी से लेकर 13वीं शताब्दी की ग्रंथों के माध्यम से परिमार्जित की जा रही है। इस कार्यशाला में अध्यक्ष के रूप में बाल ब्रह्मचारी धर्मचंद शास्त्री दिल्ली, कुलपति महेंद्र कुमार व्याकरणाचार्य प्राचार्य मुरैना, संयोजक प्रज्ञा पथ गामी बाल ब्रह्मचारी अरुण भैया सुधांश, मुख्य सूत्रधार के रूप में मंच मार्तड बाल ब्रह्मचारी आशीष भैया पुण्यांश, प्रतिष्ठाचार्य अखिलेश शास्त्री सुप्रज्ञ रमगढ़ा, सिंघई आयुष मोती वाल जबलपुर मौजूद रहेंगे। वागड क्षेत्र से प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया विरल, सागवाड़ा विधानाचार्य निलेश डेन्डू डूंगरपुर तथा प्रतिष्ठाचार्य कमलेश सिंघवी सलूम्बर भाग ले रहे हैं।