पीठ। जैन धर्म के दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म की श्रद्धा और भक्तिभाव से आराधना की गई। समाज अध्यक्ष राजकुमार डेचिया ने बताया कि इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने श्रीजी का अभिषेक, पूजन एवं आरती कर धर्मलाभ लिया।

मन-वचन-कर्म में सत्य का भाव

उत्तम सत्य दशलक्षण धर्म का पांचवां धर्म है। इसका अर्थ केवल सच बोलना नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म में सत्य एवं निष्कपटता को स्थान देना है।

सत्य धर्म व्यक्ति को अपने विचार और व्यवहार में एकरूपता रखते हुए जीवन में ईमानदारी, सरलता और विश्वास को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।

पुण्यार्जक परिवारों ने की धर्म आराधना

धार्मिक कार्यक्रम के पुण्यार्जक शीला देवी-हसमुख लाल कोठारी तथा रीता-राकेश कोठारी रहे। इस अवसर पर रोशनी-रियांक कोठारी सहित समाजजन उपस्थित रहे।

श्रद्धालुओं ने दशलक्षण महापर्व की आराधना करते हुए जीवन में सत्य को केवल वाणी तक सीमित न रखकर व्यवहार और आचरण में भी उतारने की भावना व्यक्त की।